लोकसभा चुनाव 2019: हिमाचल प्रदेश में किसानों और बागवानों का मुद्दा रहेगा सर्वोपरि

सांकेतिक तस्वीर.

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हिमाचल प्रदेश के लिहाज से लोकसभा चुनाव 2019 का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस पार्टी में बराबरी का माना जा रहा है. हिमाचल में कांग्रेस का एकछत्र राज रहा है, लेकिन पिछले एक दशक से भाजपा ने सेंधमारी की है.

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हिमाचल प्रदेश का शिमला संसदीय सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है. लोकसभा चुनाव 2019 का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस पार्टी में बराबरी का माना जा रहा है. हिमाचल में कांग्रेस का एकछत्र राज रहा है, लेकिन पिछले एक दशक से भाजपा ने सेंधमारी की है. 10 सालों से इस क्षेत्र में भाजपा के सांसद गद्दी संभाले हुए है. सबकी नजर ग्रामीण इलाके के मतदाताओं पर है क्योंकि मतदान का प्रतिशत हमेशा से ग्रामीण इलाकों में ज्यादा होता है. इस सीट में कुल 17 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें सिरमौर जिले के 5, सोलन के 5 और शिमला जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र को छोड़ कुल 7 क्षेत्र शामिल हैं. आगामी चुनाव में किसान और बागवानों का मुद्दे सबसे ऊपर रहने वाला है.



अपर शिमला का क्षेत्र सेब पैदावार बहुल इलाका है. सोलन जिला सब्जियों के पैदावार लिए जाना जाता है, जबकि सिरमौर नगदी फसलों के लिए जाना जाता है. राज्य में 80 फीसदी से ज्यादा लोग सीधे तौर पर किसानी और बागवानी से जुड़े हुए हैं. सबसे बड़े औद्यौगिक क्षेत्र इन्हीं चुनाव क्षेत्र में है. इन क्षेत्रों में पढ़े—​लिखे लोगों और नौकरी पेशा लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है.



सिरमौर के हाटी समुदाय के लिए सेब बागवानों की बढ़ती समस्याएं, आढ़तियों की मनमानी और लूट, सेब की इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी न होना, मंडियों में फल-सब्जियों के दाम न मिलना, सड़कों की खराब हालत, अपर शिमला और सिरमौर में बिजली का मुद्दा, जंगली जानवरों की समस्याएं हल न होने से लेकर नशे पर नकेल न कसे जाने जैसे कुछ प्रमुख मुद्दे हैं जो चुनावी नतीजों पर खासा प्रभाव डालेंगे.





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