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हिमाचल सरकार भी लव जिहाद पर बना सकती है कानून, मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दिए संकेत

शादी के लिए जबरन धर्म परिवर्तन कराने की पहली FIR बरेली में दर्ज (सांकेति तस्वीर)

शादी के लिए जबरन धर्म परिवर्तन कराने की पहली FIR बरेली में दर्ज (सांकेति तस्वीर)

Love Jihad Issue in Himachal Pradesh: हिमाचल में बने धर्मांतरण कानून के तहत जबरन धर्मांतरण, प्रलोभन या झांसा देकर करवाया गया धर्मांतरण संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

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शिमला. लव-जिहाद (Love-Jihad) की घटनाओं के बीच यूपी सरकार ने अध्यादेश लाकर ऐसी घटनाओं पर सख्त सजा का प्रावधान कर दिया है. वहीं कई और राज्य भी कानून लाने की तैयारी में हैं. इसी कड़ी में हिमाचल ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ी तो प्रदेश में भी लव जिहाद पर कानून लाया जाएगा. इसके संकेत कानून एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज (Law Minister Suresh bhardwaj) ने दिए हैं.

हालांकि हिमाचल (Himachal Pradesh) में पहले से ही धर्मांतरण पर कानून है. जबरन, झांसे या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाने को कठोर अपराध की श्रेणी में रखा गया है. लेकिन लव जिहाद के मामले बढ़े तो प्रदेश सरकार इसी को थोड़ा ओर विस्तार रूप दे सकती है.

हिमाचल के शहरी और विकास और कानून मंत्री.


क्या बोले कानून मंत्री
कानून मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल वैसे छोटा राज्य है, लेकिन ऐसी घटनाओं पर बंदिश लगनी चाहिए. लव जिहाद धर्मांतरण की प्रक्रिया को बढ़ाने वाला प्रचलन है. शिमला में भी दो-तीन मामले आने की सूचना है. बाकी प्रदेश कानून बना रहे हैं. ऐसे में उस डर से कोई हिमाचल आकर ऐसी घटना न अंजाम न दे सकें.

हिमाचल में पहले से ही है धर्मांतरण कानून
गौरतलब है कि हिमाचल सरकार ने 2019 में धर्म की स्वतंत्रता विधेयक को पारित किया था जो राज्यपाल की संस्तुति मिलने के बाद कानून बना है. इससे पहले, वीरभद्र सिंह सरकार ने भी 2006 में यह कानून लाया था, जिसमें जयराम सरकार ने सजा से जुड़े नए प्रावधान जोड़े. अब बड़े राज्य भी ऐसे कानून बनाने की पहल कर रहे हैं.

यह है सजा का प्रावधान
हिमाचल में बने धर्मांतरण कानून के तहत जबरन धर्मांतरण, प्रलोभन या झांसा देकर करवाया गया धर्मांतरण संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके अलावा, धर्मपरिवर्तन के उद्देश्य से किया गया विवाह भी मान्य नहीं होगा और ऐसे विवाह को चुनौती दी जा सकेगी. ऐसे मामले फैमिली कोर्ट में सुने जाते हैं. इस कानून में सामान्य श्रेणी के व्यक्ति का धर्मपरिवर्तन करते हुए पकड़ा जाता है, तो पांच साल तक की सजा का प्रावधान है. इसी तरह नाबालिग, महिला या एससी-एसटी से संबंधित लोगों का जबरन धर्मपरिवर्तन करते हुए पकड़े जाने पर अधिकतम सजा 7 साल होगी. हालांकि, स्वेच्छा से किए जाने वाले धर्मपरिवर्तन पर रोक नहीं है, लेकिन इसकी सूचना व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट के पास एक महीने पहले देनी होगी और घोषणा करनी होगी कि वह बिना डर और प्रलोभन से धर्मपरिवर्तन कर रहा है.

हिमाचल में इस कारण लाया गया था बिल
हिमाचल के चंबा, सिरमौर, मंडी, कुल्लू और शिमला के कुछेक दुर्गम इलाकों में धर्मपरिवर्तन की घटनाएं सामने आ रही थी. इसमें ईसाई मिशनरियां पर धर्मपरिवर्तन करवाने के आरोप लगते रहे हैं.इसी वजह से यह कानून लाया गया था.

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