बाल कुपोषण: MP और झारखंड सबसे निचले पायदान पर, हिमाचल शीर्ष राज्यों में शामिल

News18 Madhya Pradesh
Updated: August 27, 2019, 6:08 PM IST
बाल कुपोषण:  MP और झारखंड सबसे निचले पायदान पर, हिमाचल शीर्ष राज्यों में शामिल
‘द चाइल्ड वेल-बीइंग इंडेक्स’ रिपोर्ट बाल कुपोषण में झारखंड और मध्य प्रदेश सबसे नीचे

बच्चों की कुशलता को मापने वाले सूचकांक में झारखंड और मध्य प्रदेश खराब पोषण तथा शिशुओं के जीने की कम दर के कारण निचले पायदान पर हैं. सूचकांक में केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर रहे.

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बच्चों की कुशलता को मापने वाले सूचकांक में झारखंड और मध्य प्रदेश खराब पोषण तथा शिशुओं के जीने की कम दर के कारण निचले पायदान पर हैं. सूचकांक में केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर रहे. इस सूचकांक का आकलन बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी विकास, सकारात्मक संबंध और संरक्षण संबंधी विषयों के आधार पर किया जाता है. सूचकांक के अनुसार केरल ने स्वास्थ्य (Health), पोषण (Nutrition) और शिक्षण (Education) सुविधाओं में जबरदस्त प्रदर्शन करके शीर्ष स्थान (Top Level) हासिल किया है.

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बाल कुपोषण में सबसे निचले पायदानों पर क्रमश: मेघालय, झारखंड और मध्य प्रदेश हैं.


मंगलवार को प्रकाशित ‘द चाइल्ड वेल-बीइंग इंडेक्स’ रिपोर्ट से तीन मानकों के आधार पर बच्चों की कुशलता, उनकी सेहत को मापा जाता है. गैर सरकारी संगठनों वर्ल्ड विजन इंडिया (World Vision India) और आईएफएमआर लीड (IFMR Lead) ने इस सूचकांक को विकसित किया है.

सूचकांक में केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर

इसके तहत प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में बच्चों की स्थिति का आकलन किया जाता है. सूचकांक में केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर रहे. वहीं सबसे निचले पायदानों पर क्रमश: मेघालय, झारखंड और मध्य प्रदेश आए हैं.

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वर्ल्ड विजन इंडिया की रिपोर्ट विभिन्न मानकों को जांच कर तैयार की जाती है.


वर्ल्ड विजन इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और सीईओ (CEO) चेरियन थॉमस ने कहा, ‘‘यह रिपोर्ट बच्चों की कुशलता को मापने के लिए बहुआयामी तरीकों को उजागर करती है. इसमें महज गरीबी को ही नहीं मापा जाता, बल्कि उससे परे अन्य मानकों पर भी स्तर मापा जाता है.’’
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First published: August 27, 2019, 6:08 PM IST
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