मिलिये, हिमाचल कैबिनेट में शामिल तीन नए चेहरों से, जिन्हें मिली ‘फार्च्यूनर’
Shimla News in Hindi

मिलिये, हिमाचल कैबिनेट में शामिल तीन नए चेहरों से, जिन्हें मिली ‘फार्च्यूनर’
भाजपा विधायक राकेश पठानिया, राजेंद्र गर्ग और सुखराम चौधरी.

सिरमौर (Sirmour) के पांवटा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुखराम चौधरी मंत्री बन गए हैं. वहीं, कांगड़ा (Kangra) के नुरपूर से राकेश पठानिया को भी आखिरकार मंत्री बनाया गया है. हालांकि, कैबिनेट में चौंकाने वाली एंट्री घुमारवीं से विधायक राजेंद्र गर्ग के रूप में हुई है. माना जा रहा है कि जेपी नड्डा से करीबियों के चलते इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.

  • Share this:
शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) हो गया है. लंबे समय से कैबिनेट में स्थान की आस लगाए बैठे सिरमौर जिले को आखिर कैबिनेट में जगह मिली है. सिरमौर (Sirmour) के पांवटा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुखराम चौधरी मंत्री बन गए हैं. वहीं, कांगड़ा (Kangra) के नुरपूर से राकेश पठानिया को भी आखिरकार मंत्री बनाया गया है. हालांकि, कैबिनेट में चौंकाने वाली एंट्री घुमारवीं से विधायक राजेंद्र गर्ग के रूप में हुई है. माना जा रहा है कि जेपी नड्डा से करीबियों के चलते इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.

सुखराम चौधरी: सिरमौर जिला कांग्रेस का गढ़ रहा है और पांवटा सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है. लेकिन साल 2003 में पहली बार सुखराम चौधरी ने भाजपा के खाते में यह सीट डाली. साल 2017 चुनाव में जब वह जीते थे तो मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी मानी जा रही थी. लेकिन जिले की ही नाहन सीट से जीते राजीव बिंदल भी मंत्री पद के दावेदार थे. हालांकि, इन दोनों को ही कैबिनेट में जगह नहीं मिली और जिंदल को विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया. साल 2019 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सीएम जयराम ठाकुर ने संकेतों में बात की थी कि सबसे ज़्यादा लीड दिलाने वाले की मंत्री बनने की दावेदारी मजबूत होगी. शिमला संसदीय सीट से पांवटा विधानसभा क्षेत्र से 27517 मतों की बढ़त सुरेश कश्यप को मिली थी.

पांवटा सााहिब से विधायक सुखराम चौधरी.




राकेश पठानिया: राकेश पठानिया कांगड़ा के नुरपूर से विधायक हैं. 15 नवम्बर 1964 को कांगड़ा के लदोरी गांव में जन्मे राकेश पठानिया के पिता सेना थे. उनके पिता काहन सिंह कर्नल के पद पर रहते हुए रिटायर हुए हैं. पठानिया के राजनीतिक सफर की शुरुआत साल 1991 में हुई थी. वह भारतीय जनता किसान मोर्चा जैसे संगठनों में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. साल 1996 में भाजपा के टिकट पर राकेश पठानिया ने पहली बार विधानसभा उपचुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं पाए. वह 1998 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. साल 2003 तक पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रहे. 2003 चुनाव में उन्हें हार मिली. साल 2007 में भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय जीते. साल 2012 में फिर आजाद लड़े और हारे. हालांकि, साल 2017 में भाजपा का टिकट मिलने पर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं और अब जाकर मंत्री बने हैं. पठानियां काफी तेज-तर्रार माने जाते हैं और विधानसभा में कई बार जनता से जुड़े सवाल पूछकर अपनी ही सरकार को असहज करते रहे हैं.
नूरपुर से विधायक राकेश पठानिया.


राजेंद्र गर्ग: बिलासपुर जिले को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिला है. जेपी नड्डा के करीबी घुमारवीं से विधायक राजेंद्र गर्ग ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. गर्ग जिला बिलासपुर की गतवाड पंचायत के ठंडोडा हैं. साधारण से परिवार तालुल्क रखने वाले पहली बार ही विधायक बने हैं. इससे पहले उन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. गर्ग ने एमएससी शिक्षा प्राप्त की है. उनका संघ से गहरा नाता रहा है.

बिलासपुर जिले से घुमारवीं से विधायक राजेंद्र गर्ग.


फॉर्च्युनर का जिक्र क्यों
बता दें कि हिमाचल में मंत्रियों को फॉच्युनर दी जाती है. बीते साल ही सरकार ने प्रदेश के मंत्रियों के लिए ये गाड़ियां खरीदी थी. इस पर काफी हो-हल्ला हुआ था. ऐसे में अब मंत्री पद की तुलना सांकेतिक रूप से फॉरच्युनर से की जाती है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading