CBSE 12th Results: मिलिये, हिमाचल टॉपर भव्या से, जो बनना चाहती हैं डॉक्टर
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CBSE 12th Results: मिलिये, हिमाचल टॉपर भव्या से, जो बनना चाहती हैं डॉक्टर
शिमला की भव्या शर्मा.

भव्या ने शिमला के खलिनी के एस्पायर अकादमी से कोचिंग ली है. अकादमी के एमडी योगेंद्र कुमार का कहना है कि भव्या शुरू से ही मेहनती रही है. जब तक भव्या का कोई कांसेप्ट क्लीयर नहीं हो जाता, तब तक उस टॉपिक को छोड़ती नहीं है. भव्या का हिमाचल में टॉप करना अकादमी के लिए भी काफी गर्व की बात है.

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शिमला. सीबीएससी बोर्ड (CBSE Board) ने 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए हैं. हिमाचल प्रदेश में शिमला की भव्या शर्मा ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. भव्या शिमला के जेसीपी स्कूल की छात्रा है. भव्या ने साइंस स्ट्रीम में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं. भव्या (Bhavya Sharma) का कहना है कि स्कूल में जो कुछ भी पढ़ाया जाता है, उसे घर में एक बार जरूर दोहराना चाहिए. इससे कभी पढ़ाई का बोझ नहीं लगेगा और सिलेब्स भी समय पर कवर हो जाता है. अपनी सफलता के लिए भव्या ने अपने अभिभावकों और अध्यापकों को श्रेय दिया है.

माता-पिता की तरह डॉक्टर बनना सपना
भव्या भविष्य में अपने अभिभावकों की तरह ही डॉक्टर बनना चाहती है. इसके लिए वह नीट की तैयारी भी कर रही है. भव्या के माता पिता आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर हैं. पिता डॉ. राजेश शर्मा आईजीएमसी शिमला में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और मां डॉ. वनिता शर्मा माइक्रो बायोलॉजी विभाग में कार्यरत हैं. कोविड संकट के बीच दोनों ड्यूटी अस्पताल में दे रहे हैं.

उम्मीद नहीं थी टॉप करूंगी
भव्या का कहना है कि जब भी अभिभावक जॉब से घर लौटते है तो उस के साथ समय जरूर बिताते हैं और पढ़ाई के बारे में भी पूछते हैं. भव्या का कहना है कि उसे उम्मीद नहीं थी कि वह हिमाचल की टॉपर बनेगी. उसे लग रहा था कि उसके 95% तक ही अंक आएंगे, लेकिन 98% अंक आना उसके लिए किसी सरप्राइस से कम नहीं है.



भव्या के पापा डॉ. राजेश शर्मा आईजीएमसी शिमला में एसोसिएट प्रोफेसर हैं.
भव्या के पापा डॉ. राजेश शर्मा आईजीएमसी शिमला में एसोसिएट प्रोफेसर हैं.


अभिभवकों ने नहीं डाला दवाब
अभिभावकों ने भव्या पर कोई दबाव नहीं डाला. ना पढ़ाई को लेकर और ना ही प्रोफेशन को चुनने को लेकर. पिता राजेश शर्मा का कहना है कि उन्हें बहुत खुशी है कि उनकी बेटी ने हिमाचल में टॉप किया है और अभी से ही अपने सपने को पूरा करने के लिए काफी मेहनत कर रही है. एक डॉक्टर का समय आज कल काफी व्यस्त रहता है. कोविड के चलते अस्पतालों में ज़्यादा ध्यान देना पड़ता है. भव्या की माँ वनीता भी माइक्रो बायोलॉजी विभाग में कार्यरत होने के चलते लगातार 12 घंटे की ड्यूटी देती है. ऐसे में बच्चों को पढ़ने के लिए वक्त निकाल पाना थोड़ा मुश्किल होता है. लेकिन भव्या के दादा-दादी ने इसमे उन्हें काफी सहयोग दिया. जब दोनों अभिभावक सुबह 9 बजे ड्यूटी पर निकल जाते हैं तो उसके बाद दादा-दादी ही भव्या की देखभाल करते हैं.

भव्या ने शिमला के खलिनी के एस्पायर अकादमी से कोचिंग ली है. अकादमी के एमडी योगेंद्र कुमार.


बेटी ने नहीं दिया मौके
डॉ. राजेश का कहना है कि भव्या ने कभी उन्हें शिकायत का मौका नहीं दिया और आज अपनी मेहनत से प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. भव्य के पिता ने सभी अभिभावकों को यही संदेश दिया है कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव ना रखें. बच्चे, जो करना चाहते हैं. उसमें उनका पूरा सहयोग दें, तभी वह अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे.

यहां से ली थी कोचिंग
भव्या ने शिमला के खलिनी के एस्पायर अकादमी से कोचिंग ली है. अकादमी के एमडी योगेंद्र कुमार का कहना है कि भव्या शुरू से ही मेहनती रही है. जब तक भव्या का कोई कांसेप्ट क्लीयर नहीं हो जाता, तब तक उस टॉपिक को छोड़ती नहीं है. भव्या का हिमाचल में टॉप करना अकादमी के लिए भी काफी गर्व की बात है. इसी वर्ष भव्या शर्मा ने केवीपीवाई एग्जाम में भी पूरे भारत वर्ष में 68वां स्थान व प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था.
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