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डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी: हिमाचल पशुपालन विभाग की पहली वेटर्नरी डॉक्टर से निदेशक तक
Shimla News in Hindi

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: March 7, 2020, 8:06 PM IST
डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी: हिमाचल पशुपालन विभाग की पहली वेटर्नरी डॉक्टर से निदेशक तक
डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी के पति डॉ. एसके चौधरी भी इसी विभाग में निदेशक रिटायर हुए हैं.

डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है. सरकार ने ब्रिडिंग पॉलिसी भी लाई है, जिसमें केवल बच्छियां ही पैदा होंगी. उन्होंने पशुपालकों से भी अपील की कि वे ज्यादा पशु न रखें, बल्कि अच्छी ब्रीड के पशुओं को ही पालें.

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शिमला. डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी को देशभर में पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) की पहली महिला निदेशक बनने का गौरव हासिल हुआ है. उन्होंने हिमाचल की पहली महिला पशु चिकित्सा अधिकारी के रूप में करियर शुरू किया था और अब वह महिला वेटर्नरी ऑफिसर (Veterinary Doctor) पशुपालन विभाग की मुखिया बन गई हैं. न्यूज-18 के साथ खास बातचीत में डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने अपने अनुभव साझा किए. डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी के पति डॉ. एसके चौधरी भी इसी विभाग में निदेशक रिटायर हुए हैं.

कुछ ऐसा रहा अब तक का सफर
न्यूज-18 के साथ बातचीत में डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने बताया कि उन्होंने हरियाणा से पशु चिकित्सा का प्रशिक्षण लिया. यहां दो साल काम करने के बाद 1988 में बतौर पशु चिकित्सा अधिकारी ऊना में पहली नियुक्ति ली. पशु चिकित्सा को अपना प्रोफेशन डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने 80 के दशक में उस वक्त चुना, जब इसमें पुरुषों का दबदबा था. वह महिलाओं का पहला बैच था, जिसमें दो महिलाएं ट्रेनिंग ले रही थीं. हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से बैचलर ऑर वेटरनरी साइंस की पढ़ाई पूरी की. डॉ. प्रियदर्शिनी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है.डॉ. प्रियदर्शिनी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है.

इसलिए चुना यह प्रोफेशन



डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी कहती हैं कि उन्होंने पशु चिकित्सा को इसलिए अपने प्रोफेशन में चुना, क्योंकि पशु पालन का काम अधिकतर महिलाएं ही करती हैं. अस्पतालों में भी महिलाएं भी पशुओं को लेकर ईलाज के लिए लाती थीं. कई बार महिलाएं पुरूष चिकित्सा के साथ पशुओं की बीमारी को लेकर खुलकर बात नहीं कर पाती थी. ऐसे में उन्हें लगा कि इस फील्ड में महिलाओं को भी आगे आना चाहिए, ताकि महिला पशुपालक खुलकर अपने पालतू पशु को लेकर बात करें.



परिवार का साथ मिला
पशु चिकित्सा को प्रोफेशन के रूप में चयन करने के लिए डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी को उनके परिवार का भी भरपूर साथ मिला. क्योंकि उनके पिता हिसार विश्वविद्यालय में ही रजिस्ट्रार थे. ऊना जिला के अंब की रहने वाली डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने 32 साल विभाग में पूरे किए और अप्रैल माह में रिटायरमेंट लेंगी. हालांकि, उनसे प्रेरित होकर और कई महिलाओं ने पशु चिकित्सा को अपना करियर चुना है. डॉ. प्रियदर्शिनी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है.डॉ. प्रियदर्शिनी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है.

डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने बताया कि उन्होंने हरियाणा से पशु चिकित्सा का प्रशिक्षण लिया था.
डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने बताया कि उन्होंने हरियाणा से पशु चिकित्सा का प्रशिक्षण लिया था.


लोगों से अपील
डॉ. प्रियदर्शिनी चौधरी ने कहा कि आज बेसहारा पशु भी एक समस्या बन गई है. सरकार ने ब्रिडिंग पॉलिसी भी लाई है, जिसमें केवल बच्छियां ही पैदा होंगी. उन्होंने पशुपालकों से भी अपील की कि वे ज्यादा पशु न रखें, बल्कि अच्छी ब्रीड के पशुओं को ही पालें. जो पशु सड़कों पर घूम रहे हैं, उनके लिए सरकार ने काऊ सेंक्चुरी और गौसदन भी बनाए हैं.

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First published: March 7, 2020, 6:15 PM IST
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