बंदरों की भी ‘राजधानी’ है शिमला! 5 साल में 2813 लोगों को काटा

हिमाचल का वन विभाग बंदरों की समस्या का हल नहीं निकाल पाया. ऐसे में अब शिमला में बंदरों को वर्मिन घोषित किया गया है. यानी अब इन्हें मारा जा सकता है.

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 23, 2019, 10:48 AM IST
बंदरों की भी ‘राजधानी’ है शिमला! 5 साल में 2813 लोगों को काटा
शिमला में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ा है.
Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 23, 2019, 10:48 AM IST
अगर शिमला को बंदरों की भी राजधानी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगा. क्योंकि यहां कदम-दर-कदम बंदरों का डेरा है. आलम यह है कि शहर के लोग रोजाना खौफ के साए में घरों से निकलते हैं. बंदर अक्सर लोगों पर झपटते हैं. अगर हाथ में खाने-पीने का सामान होता है फिर तो तय मानों की आप पर बंदर झपट पड़ेगा.

सैलानी अगर शिमला घूमने जा रहे हैं तो बंदरों से बच के रहें और पूरी तैयारी से शिमला आएं. जानकारी के अनुसार, औसतन शिमला में हर दिन यहां के अस्पतालों में करीब 8 से 10 मामले बंदरों के काटने के सामने आ रहे हैं. इसमें से अधिकतर सैलानी हैं.

पांच साल का आंकड़ा
शिमला के आईजीएमसी में अस्पताल में साल 2015 में 430 मामले बंदरों के काटने दर्ज हुए थे. साल 2016 में मामले बढ़कर 626 हो गए. साल 2017 में मामलों में कुछ और बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 649 पहुंच गया. बीते साल 2018 में 742 लोगों को बंदरों ने काटा है. साल 2019 अब तक बंदरों के काटने के 366 मामले सामने आ चुके हैं. जून में 141 लोगों को बंदरों ने काटा और इलाज आईजीएमसी में करवाया.

शिमला में बंदरों का हमले बढ़े हैं. (फाइल फोटो)


जाखू में स्वागत करेंगे बंदर
शिमला का प्रसिद्ध जाखू मंदिर, जहां हजारों लोग हर रोज भगवान हनुमान के दर्शन के लिए जाते हैं. मॉल रोड से करीब डेढ़ किलो मीटर का सफर परेशानियों भरा है. क्योंकि यहां कब बंदर उछल कूद करते हुए आपका सामान लेकर भाग जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा. सामान तभी मिलेगा, अगर बंदरों को खाने के लिए कुछ दोगे. इसलिए कोशिश करें कि चश्मा, दुपट्टा और अन्य सामान बैग में ही रखें.
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यहां-यहां ज्यादा खतरा
शिमला में माल रोड़, छोटा शिमला, समरहिल, खलीणी और नवबहार से बंदरों के काटने के कई मामले के सामने आए हैं. शिमला में लोग बंदरों से इतने ज्यादा परेशान है कि छोटे बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेज सकते हैं. स्थानीय महिलाओं के अनुसार बच्चों का रास्ते में चलना मुश्किल हो गया है. कपडों को बाहर सूखने के लिए नहीं डाल सकते, क्योंकि बंदर उन्हें उठाकर ले जाते हैं. बच्चों को अकेले कहीं बाहर नहीं भेज सकते क्योंकि बदरों के काटने का खतरा रहता है. प्रशासन की ओर से भी कोई खास कदम नहीं उठाया गया है, क्योंकि अब भी कोई समाधान नहीं निकल पाया है.

केंद्र ने वर्मिन घोषित किया
हिमाचल का वन विभाग बंदरों की समस्या का हल नहीं निकाल पाया. ऐसे में अब शिमला में बंदरों को वर्मिन घोषित किया गया है. यानी अब इन्हें मारा जा सकता है. इससे पहले साल 2018 में भी बंदरों को शिमला में वर्मिन घोषित किया गया था. लेकिन इस दौरान एक भी बंदर शिमला में नहीं मारा गया. इसी साल राज्य की 91 तसहीलों-उपतहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित किया गया है. वन विभाग ने इस बारे में केंद्रीय मंत्रालय को प्रस्ताव भेज रखा था. शिमला नगर निगम क्षेत्र के अलावा अन्य 38 तहसीलों में भी बंदरों को मारने की इजाजत दी गई थी.

अब नहीं दिखते हैं मंकी वॉचर
हिमाचल वन विभाग ने शिमला शहर में कुछ समय पहले मंकी वॉचर भी तैनात किए थे. लेकिन अब वह भी नहीं दिखते हैं. इन्हें विधानसभा से लेकर जाखू और छोटा शिमला में तैनात किया गया था. पहला एरिया में विधानसभा से लेकर कालीबाड़ी, जाखू के हॉली लॉज से लेकर जाखू मंदिर, छोटा शिमला से मरीना होटल तक और चौथा एरिया आईजीएमसी के आसपास का था. प्रत्येक एरिया में दो-दो मंकी वॉचर लगाए गए हैं. लेकिन अब ये नजर नहीं आते हैं.

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First published: July 23, 2019, 10:16 AM IST
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