हिमाचल में बंदरों को न दें खाने-पीने की चीजें, हो सकती है सजा

आम लोगों के लिए खतरा बन चुके इन हिंसक बंदरों को गैर-वन वाले इलाकों में मारने की इजाजत दे दी गई है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: July 25, 2019, 4:05 PM IST
हिमाचल में बंदरों को न दें खाने-पीने की चीजें, हो सकती है सजा
हिमाचल में बंदर वर्मिन जानवर घोषित
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Updated: July 25, 2019, 4:05 PM IST
हिमाचल प्रदेश में बंदरों को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक साल के लिए वर्मिन (विनाशक) घोषित किया है. जिसके बाद आम लोगों के लिए खतरा बन चुके इन हिंसक बंदरों को गैर-वन वाले इलाकों में मारने की इजाजत दे दी गई है. ऐसे में शिमला के स्थानीय अधिकारियों द्वारा लोगों से अपील की जा रही है कि वे बंदरों को खाने-पीने वाली चीजें न दें. साथ ही बंदरों को पकड़ने में विभाग के अधिकारियों की मदद करें.

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (आईजीएमसी), शिमला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जे राज ने बताया कि आजकल हर रोज 8-10 के करीब बंदर काटने के मामले सामने आ रहे हैं. इसमें से 2-3 बंदरों द्वारा काटे जाने से गंभीर रूप से घायल होते हैं. बंदरों के काटने के मामलों में लगातार बढोत्तरी देखी जा रही है. चिकित्सा अधिकारी ने भी लोगों से अपील की है कि वे बंदरों को खाने-पीने की चींजे न दें, मौजूदा नियमों के मुताबिक यह दंणनीय अपराध है.



बता दें कि राज्य सरकार ने बंदरों को वर्मिन घोषित करने के लिए केंद्र सरकार से गुजारिश की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने यह अधिसूचना जारी की है. राज्य सरकार ने केंद्र को बताया था कि जंगलों के बाहर रीसस मकाक प्रजाति के बंदर बहुत बढ़ गए हैं और वे बड़े पैमाने पर कृषि के साथ ही लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए संकट बन रहे हैं.
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जे राज ने बताया कि आजकल हर रोज 8-10 के करीब बंदर काटने के मामले सामने आ रहे हैं.


हालांकि रीसस मकाक बंदर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजाति है, लेकिन मानव जीवन और संपत्ति को खतरा होने पर कानून इन्हें एक साल के लिए हिंसक घोषित करके इनके शिकार की अनुमति देता है.

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First published: July 25, 2019, 3:42 PM IST
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