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हिमाचल में मानसून का कहर: इस साल अब तक 424 की गई जान, 1070 करोड़ का हुआ नुकसान

इसके अलावा 133 पक्के और 700 कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है.

इसके अलावा 133 पक्के और 700 कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है.

मौसम खराब होने से सड़क हादसों और भूस्खलन (Landslide) के अलावा अचानक आई बाढ़ में लोगों की जान गई है. कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. प्रदेश के कुछ इलाकों में औसतन कम बारिश हुई है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में इस बार मानसून (Monsoon) का कहर जारी है. अब तक के आंकलन के अनुसार, प्रदेश में 1070 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान हुआ है और 424  लोगों की मौत हो चुकी है. 13 लोग अब भी लापता हैं. प्रदेश में बीते साल के मुकाबले अब तक 14 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है. आपदा प्रबंधन और राजस्व विभाग (Revenue Department) के प्रधान सचिव ओंकार चंद शर्मा (Omkar Chand Sharma) ने इसकी पुष्टि की है. प्रदेश में मौसम अब भी खराब बना हुआ है और आने वाले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहेगा. ओंकार शर्मा के मुताबिक, क्लाइमेट चेंज के चलते इस तरह का मौसम बना हुआ है, जिसके चलते बीते साल के मुकाबले इस साल नुकसान ज्यादा हुआ है. अगस्त माह में मॉनसून माइनस 19 फासदी और सितंबर में माइनस 12 फीसदी रहा.

देवभूमि में इस बार बरसात मौत लेकर बरसी है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बार मानसून में 13 जून से 21 सिंतबर तक मौत के आंकड़े ने पिछले कई सालों के रिकार्ड तोड़े हैं.  किन्नौर जिले में 4, कुल्लू में 3, लाहौल-स्पीति और चंबा में 2-2, कांगड़ा और सोलन में 1-1 व्यक्ति अब भी लापता हैं. मानसून की इस तबाही के दौरान 700 मवेशियों की मौत हुई है. 49 पक्के और 120 कच्चे मकान जमींदोज हुए हैं. इसके अलावा 133 पक्के और 700 कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है.

केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय मदद दी जाएगी
मौसम खराब होने से सड़क हादसों और भूस्खलन के अलावा अचानक आई बाढ़ में लोगों की जान गई है. कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. प्रदेश के कुछ इलाकों में औसतन कम बारिश हुई है. अचानक तेज बारिश से अधिकतर नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने भी प्राकृतिक आपदा पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि सभी जिलों के डीसी को नुकसान के आंकलन के निर्देश दिए गए हैं. केंद्र की टीम भी नुकसान का आंकलन करेगी. नुकसान का पूरा आंकलन होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय मदद दी जाएगी.

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