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बहुमंजिला PARKING का मामला : पार्किंग नगर निगम की और कब्जा सरकार का

Gulwant Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 10, 2019, 7:24 AM IST
बहुमंजिला PARKING का मामला : पार्किंग नगर निगम की और कब्जा सरकार का
पार्किंग में सरकार को और दो मंजिलें देने के लिए नगर निगम ने हामी भी भर दी है.

पिछले वर्ष दिसंबर माह में पार्किंग भी बनकर तैयार हो गई, लेकिन पार्किंग से अपनी आय बढ़ाने के लिए शिमला नगर निगम एक साल बीत जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया नहीं कर पाया है.

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शिमला. राजधानी शिमला (Shimla) एक ओर जहां पार्किंग की भारी कमी से जूझ रही है, वहीं जो पार्किंग बनी है, उसका भी प्रशासन द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. शहर के मुख्य द्वार पर टूटीकंडी बाईपास पर बनी बहुमंजिला पार्किंग (Multi-Storey Parking) एक साल बीत जाने के बाद भी शो पीस बनी हुई है. नव निर्मित पार्किंग में भले ही वाहन खड़े न हों, लेकिन प्रदेश सरकार (Himachal Government) को अपने कार्यालय शिफ्ट करने की पड़ी है. सरकार इस पार्किंग पर अपनी नजरें गड़ाए बैठी है और दो मंजिल हासिल करने के बाद अब कुछ और मंजिलों पर आंखें गड़ाए हुए है. पार्किंग में सरकार को और दो मंजिलें देने के लिए नगर निगम (Shimla Municipal Corporation) ने हामी भी भर दी है. बस अब सरकार को फैसला लेना है कि कब यहां वह अपना कार्यालय शिफ्ट करे.

एडीबी की वित्तीय मदद से पार्किंग का निर्माण हुआ

गौरतलब है कि शिमला नगर निगम ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की वित्तीय मदद से इस बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कराया था. पिछले वर्ष दिसंबर माह में पार्किंग भी बनकर तैयार हो गई, लेकिन पार्किंग से अपनी आय बढ़ाने के लिए नगर निगम एक साल बीत जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया नहीं कर पाया है. इसका खामियाजा शहर की जनता के साथ-साथ शिमला आने वाले सैलानियों को भुगतना पड़ रहा है.

सरकार की नजर पार्किंग की कुछ और मंजिलों पर

करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस पार्किंग में 750 से अधिक वाहन खड़ा करने की क्षमता है, लेकिन मजेदार बात ये है कि इस पार्किंग का आज तक इस्तेमाल नहीं हो रहा है. इस पार्किंग की दो मंजिल में आईटी विभाग ने अपना एक सेल खोला है और बाकी मंजिलें खाली हैं. अब सरकार की नजर इस पार्किंग की कुछ और मंजिलें हासिल करने की है. इसे लेकर सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारी विजिट भी कर आए हैं. वहीं नगर निगम भी इस मामले में ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है. वह पार्किंग के संचालन को लेकर टेंडर कॉल करने की बात कर रहा है, लेकिन अभी तक टेंडर नहीं हुए हैं. आज स्थिति यह है कि पीक टूरिस्ट सीजन में पार्किंग होने के बावजूद सैलानियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

‘सरकार के आदेशों का पालन करना पड़ेगा’

नगर निगम की मेयर कुसुम सदरेट का कहना है इस पार्किंग में सरकार कुछ और मंजिलें देने की मांग कर रही है और उनकी मजबूरी है कि उन्हें सरकार के आदेशों का पालन करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि नई पार्किंग एडीबी के सहयोग से बनाई गई है, लेकिन एमसी ने पार्किंग बनाने की सिर्फ एनओसी ही दी है. एक तरफ शहरवासी पार्किंग की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार और नगर निगम अपने कार्यालयों के लिए जनता के लिए बनी हुई चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब सवाल यह है कि जब सरकार ही जनता की समस्यायों का हल नहीं करेगी तो भला और कौन करेगा.
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First published: November 10, 2019, 7:18 AM IST
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