नगर निगम शिमला 28 फरवरी को नए वित्त वर्ष के लिए पेश करेगा बजट
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नगर निगम शिमला 28 फरवरी को नए वित्त वर्ष के लिए पेश करेगा बजट
शिमला - एक साल बीत जाने के बाद भी नहीं हुई नगर निगम द्वारा की गई घोषणाएं पूरी.

नगर निगम शिमला (Municipal Corporation shimla) का वार्षिक बजट (Budget) 28 फरवरी को पेश किया जाएगा. आने वाले एक साल में लोगों को नगर निगम की ओर से क्या-क्या सुविधाएं मिलनी है बजट में इसका प्रावधान होगा.

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शिमला. नगर निगम शिमला (Municipal Corporation shimla) का वार्षिक बजट (Budget) 28 फरवरी को पेश किया जाएगा. आने वाले एक साल में लोगों को नगर निगम की ओर से क्या-क्या सुविधाएं मिलनी है बजट में इसका प्रावधान होगा. नगर निगम की ओर से वर्ष 2019-20 के लिए जो बजट पेश किया गया था, उसमें शहर के लोगों को कई सुविधाएं (Facilities) देने का वादा किया गया था. जमीनी स्तर पर ज्यादात्तर सुविधाएं धरातल पर नहीं उतारी जा सकीं. विगत बजट में नगर निगम ने रसोई योजना के तहत शहर के तीनों अस्पतालों केएनएच, आईजीएमसी और रिपन में गरीबों के लिए मुफ्त खाना देने की बात कही थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई.

खुले में घूम रहे हैं आवारा जानवर

इसके अलावा शहर में आवारा पशुओं को संरक्षण देने के लिए गऊ सरंक्षण केंद्र व गोशाला खोलने की योजना बनाई गई थी, लेकिन निगम की यह योजना भी कागजों तक ही सिमट कर रह गई. इससे शहर में अभी भी सैकड़ों आवारा पशु घूम रहे हैं. इसके अलावा वर्षों से अधर में लटके रोपवे प्रोजेक्ट, ग्रीन फीस और स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले कार्य भी धरातल पर नहीं उतर पाए हैं. यहां तक कि निगम की वर्षों पुरानी टेस्ट लैब शुरू नहीं हो पाई है, जिससे करोड़ों रुपए से खरीदी हुई मशीन जंग खा रही है.



सिर्फ कागजों में की जाती हैं घोषणाएं 



इसके अलावा कूड़े से बिजली तैयार करने वाली योजना भी निगम की सिरे नहीं चढ़ पाई है. ऐसे में लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. स्थानीय लोगों की माने तो नगर निगम की ओर से सिर्फ कागजों में घोषणाएं की जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर इन्हें नहीं उतारा जाता है. नगर निगम की ओर से पिछले बजट में शव वाहन चलाने का प्रस्ताव भी लाया गया था.

तहबाजारियों को पहचान पत्र जारी नहीं किए गए

निगम के बजटीय भाषण में तहबाजारियों को बसाने के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया गया था. नेशनल स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी 2009 और रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेडिंग एक्ट 2014 के तहत शहर में तहबाजारियों के लिए वेडिंग जोन चिह्नित किए गए थे. वहीं बायोमीट्रिक सर्वे के बाद तहबाजारियों की पुलिस वेरिफिकेशन करवाकर उन्हें पहचान पत्र जारी किए जाने थे, लेकिन नगर निगम की ओर से चिह्नित किए गए तहबाजारियों को अभी तक पहचान पत्र जारी नहीं किए गए हैं.

पुरानी योजनाओं को नए सिरे से पेश करने की तैयारी !

वहीं अब एक बार फिर नगर निगम 28 फरवरी को नए वित्त वर्ष के लिए अपना बजट पेश करने जा रहा है, जिसमें निगम एक बार फिर पुरानी योजनाओं को नए सिरे से पेश करने की तैयारी कर रहा है. अब देखना होगा कि निगम अपने बजट में क्या नई योजनाएं शामिल करेगा या फिर पुरानी योजनाओं को दोहराएगा.

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First published: February 26, 2020, 6:51 PM IST
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