हिमाचल ने रचा इतिहास, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना
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हिमाचल ने रचा इतिहास, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना
हिमाचल में एजुकेशन पॉलिसी.

New Education Policy: 34 साल पहले यानी साल 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी. करीब तीन दशक से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. इसकी समीक्षा के लिए 1990 और 1993 में कमेटियां भी बनाई गई थीं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy) को लागू कर दी गई है. मंगलवार देर शाम राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही शिक्षा सचिव ने इस बाबत अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है. ऐसे में अब नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है. इसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए 43 सदस्यों का टास्क फोर्स गठित किया गया है. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर टास्क फोर्स के अध्यक्ष बनाए गए हैं. इसके अलावा समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक को सदस्य सचिव नियुक्त किया है.

टास्क फोर्स में कई लोग शामिल
शिक्षा विभाग की टास्क फोर्स में विभिन्न विभागों के सचिव, विश्वविद्यालयों के कुलपति और स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है. टास्क फोर्स ने शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, वित्त, युवा और खेल सेवाएं और सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और हायर एजूकेशन काउंसिल के अध्यक्ष, एचपीयू के अलावा क्लस्टर यूनिवर्सिटी मंडी, तकनीकी यूनिवर्सिटी हमीरपुर के कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, एससीईआरटी सोलन और डाइट शिमला के प्रिंसिपल भी सदस्य होंगे. इसके अलावा कुछ अन्य लोग मनोनीत किए गए हैं.

कैबिनेट में भी हुई थी चर्चा
हाल ही में कैबिनेट मीटिंग में भी नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चा हुई थी. एक प्रेजेंटेशन कैबिनेट में दी गई थी. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने के बाद यहां शिक्षा में कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे. पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव देखे जा सकते हैं. 34 साल बाद एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव हुए हैं. 34 साल पहले यानी साल 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी. तीन दशक से भी ज्‍यादा समय से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ. इसकी समीक्षा के लिए 1990 और 1993 में कमेटियां भी बनाई गई थीं.
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