हिमाचल के दौरे पर पहुंची न्यूजीलैंड की टीम, सेब उत्पादन को बढ़ाने के सिखाएंगे गुर

हिमाचल अब न्यूजीलैंड की मदद से सेब के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा. हिमाचल के अध्ययन के लिए तीन टीमें न्यूजीलैंड से शिमला पहुंची हैं.

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 16, 2018, 4:53 PM IST
हिमाचल के दौरे पर पहुंची न्यूजीलैंड की टीम, सेब उत्पादन को बढ़ाने के सिखाएंगे गुर
FILE PHOTO: Apple Garden
Pradeep Thakur
Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 16, 2018, 4:53 PM IST
हिमाचल अब न्यूजीलैंड की मदद से सेब के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा. हिमाचल के अध्ययन के लिए तीन टीमें न्यूजीलैंड से शिमला पहुंची हैं. यह टीम यहां पहले वैज्ञानिकों को जागरूक करेगी. हिमाचली सेब की लालिमा विदेशी तकनीक से और ज्यादा चमकेगी.

कम उत्पादन की वजह से नुकसान झेल रहे बागवानों को फायदा पहुंचाने के लिए विश्व बैंक की मदद से 1134 करोड़ रूपये की परियोजना स्वीकृत हुई है, जिसे हिमाचल में बागवानी विकास परियोजना का नाम दिया गया है.

इस परियोजना के तहत न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक सेब उत्पादन बढ़ाने के गुर सिखा रहे हैं. इसी कड़ी में न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों की तीन टीमें हिमाचल दौरे पर हैं. शिमला के मशोबरा स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र में टीम हिमाचल के वैज्ञानिकों, बागवानी विभाग के प्रसार अधिकारियों और अधिकारियों को सेब उत्पादन बढ़ाने के तकनीकी गुर सिखा रहे हैं. इसी तरह की टीमें कुल्लू-मनाली सहित सोलन व सिरमौर की तरफ भी गई है.

बागवानी विभाग के उपनिदेशक बी एस गुलेरिया ने बताया कि  न्यूजीलैंड पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सेब उत्पादन करता है. यहां प्रति हेक्टेयर 80 से 120 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि हिमाचल में अभी तक 5 से 6 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है. अब बागवानी परियोजना के जरिए न्यूजीलैंड की मदद लेकर हिमाचल 20 से 25 मीट्रिक टन सेब उत्पादन का लक्ष्य लेकर चला हुआ है.

न्यूजीलैंड से आए वैज्ञानिक जुमोरकर और जैक हयूज ने शिमला में प्रदेश के वैज्ञानिकों और बागवानी अधिकारियों को सेब उत्पादन को लेकर जानकारी दी. हिमाचल में वर्तमान में सिडलिंग विधि से सेब के रूट स्टॉक तैयार होते हैं लेकिन अब कोलोनल विधि से रूट स्टॉक उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा. खास बात यह है कि जीरो बजट खेती की तर्ज पर कम से कम कीटनाशकों के प्रयोग पर बल दिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग कर रहा है जिससे मानव शरीर और मित्र कीटों पर दुष्प्रभाव न पड़े. इसके अलावा कटिंग-प्रूनिंग की जानकारी भी बागवानों को दी जाएगी.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर