शिमला में NGT का डंडा: सरकार विकल्पों पर कर रही विचार: मंत्री भारद्वाज

हिमाचल की राजधानी शिमला.

NGT issue in Shimla: फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने के लिए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता की राय ली गई है. मंत्री ने कहा कि राय लेने के बाद ही सरकार फैसला लेगी. अगर इससे भी बात नहीं बनती तो सरकार अन्य विकल्पों पर विचार करेगी.

  • Share this:
शिमला. हिमाचल प्रदेश में प्लानिंग एरिया (Planning Area) में बीते 2 साल से कोई भी सरकारी भवन नहीं बन पाया है. शिमला में नई टॉउनशिप निर्माण समेत स्मार्ट सिटी के होने वाले कई काम भी रूके हुए हैं. एनजीटी (NGT) ने नवंबर 2017 में प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से अधिक भवन निर्माण पर रोक लगाने के आदेश दिए थे, 2 वर्ष पूर्व सरकार की रिव्यू पटिशन भी खारिज हो गई थी, उसके बाद से अब तक सरकार सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जाने के अलावा इस विषय पर कुछ नहीं कर पाई है. प्रदेश के करीब 32 हजार भवन मालिक भी इस फैसले के बाद सकते हैं, सरकार की पहल का इंतजार कर रहे हैं, इन्होंने अनुमति के भवन बना रखे हैं.

शिमला समेत प्रदेश के कई शहरों के लोग इसमें शामिल हैं. कुछ ऐसे इलाकों में मकान बनाए गए हैं, जो पंचायतों के अधीन थे लेकिन बाद में वो क्षेत्र निगम या स्थानीय निकाय में तहत लाए गए. शिमला और धर्मशाला के न्यू मर्ज एरिया में इसको लेकर परेशानी सबसे ज्यादा है. आदेश में यह भी कहा था कि इन क्षेत्रों में बने भवनों को रेगुलर करने के लिए एन्वायरन्मेंट सेस रेगुलराइजेशन फीस के साथ वसूला जाए.

ये बोले मंत्री

इस बाबत शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज का कहना है कि इन आदेशों से न तो स्कूलों के भवन से लेकर अस्पताल तक कुछ नहीं बन पा रहे हैं. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है. ये आदेश पहाड़ी इलाकों के लिहाज से सही नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की एक लेटेस्ट जजमेंट के अनुसार हर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को रिट ज्यूरिस्डिक्शन के अंदर किसी भी ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ सुनवाई का अधिकार है. इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने के लिए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता की राय ली गई है. मंत्री ने कहा कि राय लेने के बाद ही सरकार फैसला लेगी. अगर इससे भी बात नहीं बनती तो सरकार अन्य विकल्पों पर विचार करेगी.

ये बोला विपक्ष

नगर निगम शिमला के पूर्व मेयर और माकपा नेता संजय चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेवारी से पीछे हट रही है. इस फैसले को लेकर न पूर्व की कांग्रेस सरकार कुछ कर पाई और न ही वर्तमान सरकार कुछ कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार एक सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाना चाहिए, साथ ही उस पर विधानसभा मे प्रस्ताव लाकर कानून की शक्ल देनी चाहिए. चौहान ने कहा कि 2015-16 में मेयर रहते हुए उन्होंने एक प्लान बनाकर दिया था, सरकार उसे अंतिम रूप देना था लेकिन सरकार अब तक उस पर खामोश है. उन्होंने कहा कि 1979 से चल रहे प्लान के तहत ही सरकारें अब तक कार्य कर रही हैं.