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VIDEO: शिमला में नाइट-कर्फ्यू लगते ही मचा बवाल, शोघी बैरियर पर पर्यटकों का हंगामा, मंत्री भी फंसे

शिमला में शोघी बैरियर पर हंगामा.
शिमला में शोघी बैरियर पर हंगामा.

Night Curfew in Shimla: कोरोना वायरस को लेकर फिर से नाइट कर्फ्यू. पुलिस ने शिमला आने-जाने वाले रास्तों पर लगाए बैरियर तो फंसे कई पर्यटक. सिर्फ इमरजेंसी सेवा वाले वाहनों को ही मिल रही अनुमति.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में चार जिलों में मंगलवार से नाइट कर्फ्यू (Night Curfew) लग गया है. शिमला, मंडी (Mandi), कुल्लू और कांगड़ा (Kangra) जिलों में 15 दिसंबर तक हर रोज रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक ये लागू रहेगा. शिमला (Shimla) में कर्फ्यू लगते ही बवाल मच गया. शोघी बैरियर पर पर्यटकों ने जमकर हंगामा किया. रात के 8 बजते ही पुलिस ने शिमला की सीमा को सील कर दिया. आपको बता दें कि शोघी से शिमला जिले की सीमा शुरू होती है.

पुलिस ने शोघी में एनएच पर बैरिकेट्स लगा दिए और सोलन से शिमला की ओर आने वाले वाहनों को भी रोक दिया. पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों की गाड़ियों को बैरियर पर रोक दिया गया, जिससे काफी वाहनों की काफी लंबी कतार लग गई. गाड़ियां रोके जाने से नाराज कुछ पर्यटक अपने वाहनों से नीचे उतर आए और उनकी पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोक-झोंक भी हुई. हंगामे के बीच प्रदेश के उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर भी काफी देर तक जाम में फंसे रहे. पुलिस ने उन्हें किसी तरह बाद में शिमला की ओर रवाना किया.


इमरजेंसी सेवा वाले वाहनों को ही अनुमति
पुलिस से बहस कर रहे पर्यटक मांग की जा रही थी कि उन्हें शिमला जाने दिया जाए, उनकी बुकिंग है, ऐसे बीच रास्ते में नहीं रुक सकते. इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जमकर बहसबाजी हुई. दिल्ली से आए एक दंपति ने दलील दी कि वो सोलन में एक शादी समारोह में आए थे, उनका एक साल का बच्चा  शिमला में एक होटल में परिवार के अन्य सदस्य के पास छूटा हुआ है. पुलिसकर्मी कहते रहे कि उनके पास ऐसे आदेश हैं कि जरूरी सेवाओं और इमरजेंसी के वाहनों को छोड़ा जाएगा, बाकि किसी को भी जाने नहीं दिया जाएगा. महिला जिद्द पर अड़ गई कि अगर गाड़ी नहीं जाने देंगे तो वो पैदल ही निकल जाएंगी. काफी देर तक ये सब चला रहा, अन्य पर्यटक भी अपनी बात कहते रहे और आगे जाने की मांग करते रहे. इस बीच आला अफसरों से बात करने के बाद उन्हें जाने दिया गया. जिनके पास छोटे बच्चे थे उन्हें छोड़ा गया.



स्थानीय लोग भी रोके गए
पुलिस ने स्थानीय लोगों को भी रोक दिया. बैरियर से 500 मीटर की दूरी पर दुकान चलाने वाले एक दुकानदार की दलील थी कि दुकान बंद करते हुए थोड़ा समय लग गया, इतने में 8 बज गए और बैरियर तक पहुंचते पहुंचते 5 मिनट ज्यादा हो गए. कोई ऑफिस से लेट हो गया था तो कोई खरीदारी करने सोलन गया था. कोई दवाई लाने शिमला आ रहा था, पुलिस ने सबको रोके रखा और जिसकी परेशानी सही थी उसे जाने दिया गया.

बैरियर पर फंसे मंत्री
इस हंगामे के बीच उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर भी फंसे रहे. काफी मशक्कत के बाद उनकी गाड़ी वहां से शिमला की ओर निकली. इस दौरान मौके पर मौजूद इंचार्ज को मंत्री ने मौखिक आदेश दिए कि जिनकी परेशानी है, उन्हें जाने दिया जाए. साथ में ये भी कहा कि ज्यादातर लोगों को कर्फ्यू की जानकारी नहीं है, ऐसे में ढिलाई बरती जाए और उन्हें जाने दिया जाए. इसके बाद मंत्री दनदनाते हुए वहां से निकल गए. लोगों के हंगामे के बीच एसपी मोहित चावला को मौके पर आना पड़ा और स्थिति को संभाला.

लोगों ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर पर्यटकों ने सबसे ज्यादा सवाल उठाए. पर्यटकों का कहना था कि उन्होंने काफी समय पहले बुकिंग कर रखी थी, पैसा खर्च किया है और अब आधे रास्ते में ये जानकारी मिलती है कि कर्फ्यू लग गया है, ऐसे में वो कहां जाए. कुछ लोगों ने कहा कि रात में कर्फ्यू लगाने से कोई फायदा नहीं है, सरकार को कुछ और उपाय करना चाहिए था. इस बीच कुछ लोग 8 बजे के बाद भी फंसे हुए नजर आए, लोग अपने घरों तक जाने के लिए बस का इंतजार करते हुए नजर आए.

बाजार समय पर बंद हुए
शहर में बाजार समय पर बंद हुए. हालांकि कुछ दुकानदारों ने 8 बजे बाद अपनी दुकान पूरी तरह से बंद की. सरकार के इस फैसले को सही बताते हुए नजर आए.
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