फर्जी डिग्री केस: सवालों में शिमला पुलिस, APG यूनिवर्सिटी के खिलाफ 2019 में हुई थी शिकायत, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
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फर्जी डिग्री केस: सवालों में शिमला पुलिस, APG यूनिवर्सिटी के खिलाफ 2019 में हुई थी शिकायत, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
शिमला की एपीजी यूनिवर्सिटी.

सूत्रों से ये भी पता चला है कि शिकायतकर्ता सीआईडी का गवाह भी बन गया है. उसके पास फर्जी डिग्रियों को लेकर पुख्ता कागज भी हैं. इसी के चलते शायद उन्हें खतरा भी महसूस हो रहा है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में फर्जी डिग्री मामले में अब शिमला पुलिस भी सवालों के घेरे में आ गई है. दरअसल फर्जी डिग्री को लेकर शिमला स्थित एपीजी विश्वविद्यालय के खिलाफ पुलिस को 25 सितंबर 2019 में शिकायत मिली थी. एपीजी के लॉ विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष ने ये लिखित शिकायत छोटा शिमला थाने में दी थी. शिकायत पत्र पर थाने की मुहर लगी है और हेड कॉन्सटेबल के हस्ताक्षर भी हैं, जो इस बात को पुख्ता कर रहे हैं कि पुलिस को शिकायत मिली है.

शिकायत पत्र में लिखा था कि उन पर फर्जी डिग्री बनाने के लिए वाइस चांसलर दबाव डालते थे. बहुत बार दबाव डाला गया, लेकिन हर बार उन्होंने मानने से इनकार कर दिया. अंत में प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया. यह कहा गया कि उनके खिलाफ शिकायत है और डीन कमेटी के पास शिकायत है. जब प्रशासन से कम्पलेंट की कॉपी मांगी गई तो उन्हें दी नहीं गई. जिस दिन उन्हें निलंबित किया गया उसी दिन यह शिकायत पत्र थाना प्रभारी को लिखा गया.

पत्र में वाइस चांसलर का नाम
पत्र में विस्तारपुर्वक शिकायतकर्ता ने अपनी बात कही है. इसके लिए सीधे तौर पर वाइस चांसलर का नाम लिखा है. शिकायत पत्र में लिखा है कि वाइस चांसलर बड़े आदमी हैं, उनसे शिकायकर्ता और उसके परिवार को बड़ा खतरा है. अगर उन्हें कुछ हो जाता है तो इसके लिए वाइस चांसलर जिम्मेदार होंगे.इस शिकायत को निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग को भी लिखा गया था
नौ महीने पहले शिकातय मिली थी


अब सवाल पुलिस पर उठ रहे हैं कि 9 महीने पहले इस तरह की शिकायत मिली थी तो क्या कार्रवाई की गई. उस वक्त तो न यूजीसी से कोई निर्देश आए थे ना ही राज्य सरकार ने कोई आदेश दिए थे. क्या पुलिस ने इस शिकायत को सामान्य शिकायत मान लिया या फिर जानबूझकर जांच नहीं की गई. शिकायत पत्र को फाइलों के बीच दबा दिया या फिर कोई और बात है.

मानव भारती के खिलाफ सोलन पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी
बता दें कि सोलन पुलिस के पास मानव भारती यूनिवर्सिटी के खिलाफ शिकायत पहुंची थी तो सोलन पुलिस ने मानव भारती के कैंपस में 15 दिनों से ज्यादा डेरा डाला रखा. रिकार्ड कब्जे में लिया. राज्य बाहर राजस्थान तक तफ्तीश की और बड़ी गिरफ्तारियां भी की, लेकिन यहां इसी तरह के केस में शिमला पुलिस के पास बताने तक के लिए कुछ नहीं है. थाने के एसओ समेत एसपी भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. अगर उस वक्त जांच की गई होती तो सीआईडी के पास यह मामला न जाता.

शिकायतकर्ता सीआईडी का गवाह भी बन गया है
सूत्रों से ये भी पता चला है कि शिकायतकर्ता सीआईडी का गवाह भी बन गया है. उसके पास फर्जी डिग्रियों को लेकर पुख्ता कागज भी हैं. इसी के चलते शायद उन्हें खतरा भी महसूस हो रहा है. खैर, शिकायत पत्र में लिखी बातों में कितनी सच्चाई है और कितना झूठ है, इसका पता तो पुलिस लगा ही सकती थी. बता दें कि इन दोनों यूनिवर्सिटीज पर पांच लाक से ज्यादा फर्जी डिग्री बेचेने के आरोप लगे हैं.
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