शिमला: एंबुलेंस रोड नहीं, स्ट्रेचर के सहारे मरीज, रेल रोकने की चेतावनी
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शिमला: एंबुलेंस रोड नहीं, स्ट्रेचर के सहारे मरीज, रेल रोकने की चेतावनी
शिमला रेलवे स्टेशन. (सांकेतिक तस्वीर)

Road issue in Shimla: शिमला से मात्र सात किलोमीटर दूर मज्याठ वार्ड नगर निगम शिमला का भाग है .साल 2017 में बने इस वार्ड में न तो कोई पार्किंग की सुविधा है और न ही एम्बुलेंस रोड़.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) की यह तस्वीर शर्मसार करने वाली है. शिमला (Shimla) मुख्यालय से मात्र सात किलोमीटर दूर की है, जहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति को उपचार के लिए स्ट्रेचर के सहारे अस्पताल ले जाया जा रहा है.यह नजारा नगर निगम शिमला के मज्याठ वार्ड का है, जहां 21 वीं सदी में भी एम्बुलेंस रोड की सुविधा नहीं है. साल 2017 में यह वार्ड नगर निगम के अस्तित्व में आया है, लेकिन रेलवे और निगम के बीच चल रहे जमीनी विवाद के चलते वार्ड के लोगों को एम्बुलेंस रोड़ (Ambulance Road) की सुविधा नहीं मिल पाई है.

जमीन पर एनओसी न देने से लटका मामला
रेलवे मंत्री से मिलने के बाद भी नहीं मिली जमीन की एनओसी एम्बुलेंस रोड़ के लिए जमीन पर एनओसी न देने पर अब वार्ड की जनता ने रेलवे के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला लिया है और आगामी एक अक्टूबर को रेल रोकने का फैसला लिया है. वार्ड पार्षद दिवाकर शर्मा के मुताबिक वार्ड में एम्बुलेंस रोड़ के लिए साल 2017 से कवायद शुरु की गई है, जिस पर सरकार और रेलवे विभाग से कई बार मुलाकात और ज्ञापन सौंपकर रास्ता देने की मांग की है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की जनता को एम्बुलेंस रोड़ की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने बताया कि रेलवे से लगती जमीन को लेकर इस मामले दो साल पहले तत्कालीन रेलवे मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष मामला उठाया था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

शिमला में स्ट्रेचर पर ले जाते हुए मरीज.

अब आंदोलन का फैसला


एम्बुलेंस रोड़ के लिए रास्ता न मिलने पर वार्ड की जनता ने रेलवे और सरकार के खोलाफ़ आंदोलन करने या निर्णय लिया है जिसके तहत आगामी एक अक्टूबर को रेल रोककर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.उन्होंने बताया कि हालांकि प्रदेश सरकार और रेलवे विभाग को 20 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है कि रास्ते को लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया जाए लेकिन यदि 20 दिनों के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलता है तो एक अक्टूबर को उग्र आंदोलन कर रेल रोकी जाएगी. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले मज्याठ वार्ड की परिधि नगर निगम के अधीन थी लेकिन उस समय टूटू वार्ड हुआ करता था, लेकिन 2017 में जब नया वार्ड बना तो वार्ड में निगम की कोई भी सड़क मौजूद नहीं है. अब जब वार्ड वासी एक एम्बुलेंस रोड़ की मांग कर रहे हैं तो उसमें भी विश्व धरोहर की जमीन आड़े आ रही है, जिससे लोगों को एम्बुलेंस रोड़ का लाभ नहीं मिल पाया है.उन्होंने कहा कि सरकार और रेलवे जल्द उन्हें एम्बुलेंस रोड़ के लिए रास्ता दे, ताकि वार्ड की जनता को इसका लाभ मिल सके.

कई तरह के टैक्स देने के बाद भी नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं
बता दें कि शिमला से मात्र सात किलोमीटर दूर मज्याठ वार्ड नगर निगम शिमला का भाग है .साल 2017 में बने इस वार्ड में न तो कोई पार्किंग की सुविधा है और न ही एम्बुलेंस रोड़,लेकिन अब जब वार्ड पार्षद वार्ड का विकास करने के लिए योजनाएं बना रहे हैं तो उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.यही नहीं विश्व धरोहर रेलवे ट्रैक से आने वाला रास्ता भी वार्ड के विकास में बाधा पहुंचा रहा है ऐसे में कई तरह के टैक्स देने के बाद भी यदि जनता को मूलभूत सुविधाएं न मिल पाए तो विकास भी गौण हो जाता है.
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