वेंटिलेटर पर हिमाचल का एकमात्र कैंसर अस्पताल, 5 साल में नहीं खर्च पाया 45 करोड़

शिमला का कैंसर अस्पताल.
शिमला का कैंसर अस्पताल.

स्वास्थ्य मंत्री वीपिन सिंह परमार का कहना है कि प्रदेश में अब टांडा में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन स्थापित की जा रही है.

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हिमाचल प्रदेश का एक मात्र कैंसर अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर है. यहां पर असुविधाओं का अंबार है. यहां प्रदेश भर से आने वाले मरीज बेहाल हैं. आईजीएमसी शिमला का टर्शरी कैंसर केंद्र, जहां प्रदेश भर से मरीज इलाज करवाने के लिए आते हैं. लेकिन यहां असुविधाओं के अंबार के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

मरीज को यहां सबसे पहले बैड के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है. हर रोज अस्पताल में करीब 100 लोग इलाज के लिए आते हैं. वार्ड में केवल 42 ही बैड हैं, ऐसे में बाकी मरीजों को अस्पताल के बाहर बने ग्रीन हाउस में ही रुकना पड़ता है. हालांकि, मरीजों की तादाद इतनी होती है कि वहां भी जगह नहीं मिल पाती. मजबूरन, मरीजों को अस्पताल के गेट पर ही सोना पड़ता है. इलाज करवाने के लिए मरीजों को महीनों अस्पताल में रहना पड़ता है और जब यहां से कुछ नहीं बना तो मजबूरन उन्हें इलाज करवाने के अन्य राज्यों के महंगे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है.

गरीबों को ज्यादा परेशानी
समस्याएं यहीं खत्म नहीं होती. जो मरीज आर्थिक रूप से समृद्ध हैं वह तो अपना इलाज महंगे अस्पतालों से करवा लेते हैं, लेकिन गरीब परिवार से संबंध रखने वाले मरीज पूरी तरह से इसी अस्पताल पर निर्भर करते हैं. कैंसर का इजाल करने के लिए यहां दो कोबाल्ट मशीनें हैं, लेकिन ये भी ज्यादातर समय खराब ही रहतीं हैं. इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. कई बार तो मरीज की अप्वाइंटमेंट होती है और मशीन खराब होने से वह इंतजार करता रहता है.
ये मशीनें करीब 19 साल पुरानी हैं. दूसरे राज्यों में कैंसर संस्थानों में अत्याधुनिक डिजीटल मशीन लीनियर एस्केलेटर से कैंसर का इलाज किया जाता है. यही नहीं, जिन मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्सिज होते हैं और कैंसर का इलाज किया जाता है, वहां पर मैडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार डीजिटल मशीन लीनियर एस्केलेटर मशीन का होना अनिवार्य है. लेकिन प्रदेश के एकमात्र कैंसर अस्पताल में बाबा आदम के जमाने की पद्धति से मरीजों का इलाज किया जा रहा है और मरीज इसी पद्धति से इलाज करवाने के लिए मजबूर है.



मशीन काफी पुरानी
आईजीएमसी के कैंसर हॉस्पिटल से कोबाल्ट मशीन से मरीजों के कैंसर की जांच की जा रही है. मगर पुरानी तकनीक होने के कारण एक तो यह धीमी गति से काम करती है। इस मशीन में कई बार साफ तौर पर कैंसर का पता नहीं चल पाता. लीनियर एक्सेलरेटर की खासियत ये है कि इस मशीन से दी जाने वाली रेडिएशन कैंसर सेल्स को तो नष्ट करती है, लेकिन नार्मल व हेल्थी सेल्स को न के बराबर नुकसान भी नहीं करती. इस मशीन से रेडियोथैरेपी ट्रीटमेंट में रिस्क नहीं है, लेकिन आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में ये मशीन न जाने कब लगेगी.

आठ साल में तीन सरकारें बदली, लेकिन मशीन नहीं लगी
अस्पताल में रोगियों को एडवांस ट्रीटमेंट देने वाली लीनियर एक्सेलरेटर मशीन लगाने की प्रक्रिया आठ साल पहले शुरू हुई. 8 साल में तीन सरकारें बदली, लेकिन ये मशीन नहीं लगी. साल 2010 में इस मशीन को लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी. प्रशासनिक अधिकारियों ने मसला कई बार आला अधिकारियों व मंत्रियों के समक्ष भी उठाया, मगर अभी तक प्रक्रिया फाइलों में ही है. इस वजह से कैंसर के मरीजों के जो टेस्ट और इलाज कैंसर अस्पताल शिमला में फ्री में होता है, वह टेस्ट सिर्फ इस मशीन के न लग पाने की वजह से बाहर जाकर 50 हजार में करवाने पड़ रहे हैं. कोबाल्ट मशीन में समय लगने के कारण 40 फीसदी रोगियों को ही टेस्ट की डेट मिल पाती है. बाकी को चंडीगढ़ जाकर टेस्ट के लिए 50 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं. लीनियर एक्सेलरेटर मशीन की कीमत करीब 15 करोड़ रुपए है.

पूर्व सीएम ने की थी घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी कैंसर अस्पताल में एक कार्यक्रम के दौरान यहां पर लीनियर एक्सेलरेटर मशीन लगाने की घोषणा की थी. उन्होंने अस्पताल में भवन निर्माण के अलावा मशीनरी के लिए 45 करोड़ का प्रावधान किया था. इसके लिए औपचारिकताएं भी पूरी की जाने लगी थी, मगर बाद में आचार संहिता लगने से काम भी ठंडे बस्ते में चल गया.

ये बोले स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री वीपिन सिंह परमार का कहना है कि प्रदेश में अब टांडा में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन स्थापित की जा रही है. केंद्र सरकार की ओर से शिमला के कैंसर अस्पताल के लिए करीब 40 करोड के बजट का प्रवधान किया गया है लेकिन एनजीटी की ओर से अनुमति न मिलने और कोर एरिया के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है. सरकार ने एनजीटी को लिखा है कि जनहित के लिए यूनिट शुरू करने की वहां इजाजत दी जाए. वहां से पर्मीशन मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा.
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