हिमाचल में कोविड केयर सेंटर के आसपास साईलेंट जोन, पटाखे फोड़ने पर रोक

हिमाचल में प्रदूषण.
हिमाचल में प्रदूषण.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉक्टर निपुन जिंदल ने कहा कि प्रदेश में कोविड की स्थिति को देखते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं. ऐसे में कोविड केयर सेंटर के अलावा बहुत सारे मरीज ऐसे भी हैं, जो अपने घरों पर ही आइसोलेट हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 2:33 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश में कोरोना (Corona Virus) के मामले लगातार बढ़ रहे है. कोविड से मौतों का आंकड़ा भी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. दिवाली को देखते हुए हिमाचल में लोग पटाखे फोड़ते हैं, जिसकी वजह से प्रदेश में प्रदूषण (Pollution) का स्तर कुछ दिनों के लिए और बढ़ जाता है. पटाखों (Fire Crackers) के धुए से वातावरण में आर एसपीएम का स्तर बढ़ जाता है. इससे लोगों को सांस (Breathing) लेने में तकलीफ होती है या सांस से संबंधित कोई बीमारी होती है उनके लिए यह काफी नुकसानदायक होता है.

कोविड सेंटर के आसपास परेशानी
हिमाचल प्रदेश में कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है, क्योंकि यह वायरस रेस्पिरेटरी सिस्टम पर असर करता है. दीवाली पर्व के दिन जलने वाले पटाखों से पैदा होने वाले प्रदूषण और धुए से कोरोना के मरीजों को और ज्यादा समस्या हो सकती है. ऐसे में प्रदेश में जहां भी कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं, वहां के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पटाखे न जलाने को लेकर निर्देश जारी किए हैं.

बोर्ड हर रोज प्रदेश के 11 शहरों की वायु की मॉनिटरिंग करता है. प्रदेश में सात शहर ऐसे है, जहां वायु प्रदूषण ज्यादा है, जिसमें चार नवंबर को काला अम्ब में सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया गया है. पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एनजीटी ने भी रिपार्ट मांगी है, लेकिन सरकार की ओर उनसे इस सम्बंध में कोई जवाब नहीं दिया गया है. पटाखों से वायु प्रदूषण ज्यादा होता है, जिससे एयर क्वॉलिटी में असर पड़ता है और जैसे कोरोना संक्रमण फैला हुआ है तो कोरोना मरीजो पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.
क्या रहा प्रदूषण


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 4 नवंबर को प्रदेश में आरएसपीएम का स्तर मापा गया था, जिसमें से प्रदेश के 7 शहरों में वायु सबसे ज्यादा प्रदूषित निकली. सबसे ज़्यादा कालाअंब में 179.3, इसके बाद बद्दी में 177, पौंटा 107, डमटाल में 89, सुंदरनगर में 87, नालागढ़ 75 और धर्मशाला में 74 आरएसपीएम का स्तर रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा, परमाणु में 53, शिमला में 50 और सबसे कम आरएसपीएम का स्तर मनाली में 37.5 रिकॉर्ड किया गया.

साईलेंट जोन बनाए
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोविड केअर सेंटर्स के 100 मीटर के दायरे में साइलेंट जोन बनाए हैं. इन सेंटर्स के 100 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं होगी. प्रदेश में अधिकतर कोविड केयर सेंटर अस्पतालों में ही बनाए गए हैं, लेकिन कुछ एक सेंटर अन्य भवनों में भी बनाए गए हैं. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के आसपास भी साइलेंट जोन बनाए गए हैं. इसको लेकर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर इन सेंटर्स के आसपास लोग पटाखे ना फोड़ें.

क्या बोला आयोग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉक्टर निपुन जिंदल ने कहा कि प्रदेश में कोविड की स्थिति को देखते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं. ऐसे में कोविड केयर सेंटर के अलावा बहुत सारे मरीज ऐसे भी हैं, जो अपने घरों पर ही आइसोलेट हुए हैं. अगर दिवाली के दिन इन मरीजों के घरों के आसपास भी लोग पटाखे जलाते हैं तो ऐसे में इन मरीजों के लिए काफी नुकसानदेह होगा. ऐसे में लोगों से आग्रह है कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस बार दिवाली पर बहुत कम पटाखे फोड़े और उनके क्षेत्र में अगर कोई कोविड केयर सेंटर है, यह आसपास किसी घर में कोरोना का मरीज आइसोलेट हुआ है तो वहां पटाखे ना फोड़े.
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