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No Honking: हिमाचल में बेफिजूल हॉर्न बजाने पर ट्रैफिक पुलिस काटेगी चालान
Shimla News in Hindi

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 4, 2020, 1:30 PM IST
No Honking: हिमाचल में बेफिजूल हॉर्न बजाने पर ट्रैफिक पुलिस काटेगी चालान
शिमला और मनाली नो हॉकिंग जोन हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

विशेष सचिव पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी डी सी राणा ने कहा कि अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने से आम लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं. शिमला और मनाली में ध्वनि प्रदूषण (Sound Pollution) भी ज्यादा है. ऐसे में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ अब मोटर वाहन अधिनियम में दी गई शक्तियों के तहत चालान (Challan) करने के पुलिस को आदेश दिए गए हैं

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के दो प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों- शिमला (Shimla) और मनाली (Manali) में अनावश्यक हॉर्न (No Honking) बजाने का सिलसिला नहीं थम रहा है. पुलिस (Himchal Police) को चालान करने के आदेश भी हैं, लेकिन दोनों शहरों में पुलिस चालान (Challan) करने से कतरा रही है. अब सरकार ने इस संबंध में फिर से सख्त आदेश जारी किए हैं. शिमला और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली की सड़कों पर हर रोज हजारों की संख्या में वाहन दौड़ते हैं. पर्यटन सीजन में यह संख्या और बढ़ जाती है. इस दौरान सड़कों पर जाम लगने की समस्या आम हो जाती है और वाहन चालकों द्वारा बेवजह हॉर्न बजाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. हालांकि, मोटर वाहन अधिनियम के तहत पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ चालान भी कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. बहरहाल, अब सरकार ने फिर से पुलिस को आदेश जारी किए हैं कि वो अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने वालों के चालान करें.

मनाली और शिमला में नो हॉन्किंग
पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने तीन अगस्त, 2018 को नो हॉन्किंग कैंपेन मनाली और शिमला से शुरू किया था. इसके बाद वाहन चालकों को जागरूक करने का सिलसिला भी शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है. विशेष सचिव पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी डी सी राणा ने कहा कि अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने से आम लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं. शिमला और मनाली में ध्वनि प्रदूषण भी ज्यादा है. ऐसे में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ अब मोटर वाहन अधिनियम में दी गई शक्तियों के तहत चालान करने के पुलिस को आदेश दिए गए हैं.

विभाग की करें शिकायत

गाड़ियों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के अलावा डीजे या स्पीकर से किए जाने वाले ध्वनि प्रदूषण की शिकायत भी आम लोग सीधे विभाग को कर सकते हैं. इसके लिए, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एक मोबाइल ऐप भी तैयार की है, जिसे ‘शोर नहीं’ नाम दिया गया है. इस ऐप के जरिए उस स्थान का साउंड लेवल रिकॉर्ड कर के विभाग को भेजा जा सकता है. मोबाइल ऐप के बारे में जागरूक करने के लिए डीसी और एसडीएम ऑफिस में अवेयरनेस मटीरियल रखा जाएगा.

इंसान की सुनने की सहनशक्ति
बता दें कि इंसान की सुनने की सहनशक्ति 55 से 60 डेसिबल होती है. 60 से अधिक डेसिबल को शोर या ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है. ज्यादा शोर शरीर के नर्वस सिस्टम पर दुष्प्रभाव डालता है. हालांकि सरकार शिमला और मनाली के बाद अब दूसरे शहरों में भी नो हॉन्किंग कैंपेन शुरू करने की बात कह रही है. लेकिन सवाल है कि पहले से लागू शिमला और मनाली में कब तक ध्वनि प्रदूषण रुकेगा.ये भी पढ़ें: VIDEO: हिमाचल में टोल प्लाजा पर स्कॉर्पियो सवारों ने कर्मी को घसीटा, फिर पीटा

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First published: February 4, 2020, 11:40 AM IST
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