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शिमला व मनाली में नहीं थम रहा ध्वनि प्रदूषण, अब बेवजह हॉर्न बजाने पर कटेंगे चालान
Shimla News in Hindi

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 2, 2020, 5:10 PM IST
शिमला व मनाली में नहीं थम रहा ध्वनि प्रदूषण, अब बेवजह हॉर्न बजाने पर कटेंगे चालान
पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एक मोबाइल एप्प भी तैयार की है, जिसे 'शोर नहीं' नाम दिया गया है.

राजधानी शिमला (Shimla) और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली (Manali) की सड़कों पर हर रोज हजारों वाहन दौड़ते हैं. पर्यटन सीजन (Tourist season) में यह संख्या और बढ़ जाती है. इस बीच जाम लगना आम बात हो जाती है और फिर शुरू हो जाता है बेवजह हॉर्न (Horn) बजाने का सिलसिला.

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शिमला. हिमाचल के दो प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिमला और मनाली (Shimla and Manali) में अनावश्यक हॉर्न (Unnecessary horn) बजाने का सिलसिला नहीं थम रहा है. पुलिस को चालान (Challan) करने के आदेश भी हैं, लेकिन दोनों शहरों में पुलिस चालान करने से भी कतरा रही है. अब सरकार ने फिर से सख्त आदेश जारी किए हैं. राजधानी शिमला और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली की सड़कों पर हर रोज हजारों वाहन दौड़ते हैं. पर्यटन सीजन (Tourist season) में यह संख्या और बढ़ जाती है. इस बीच जाम लगना आम बात हो जाती है और फिर शुरू हो जाता है बेवजह हॉर्न बजाने का सिलसिला.

वाहन चालकों को जागरूक किया गया मगर ...

पुलिस मोटर वाहन अधिनियम के तहत बेवजह हॉर्न बजाने वाले लोगों के खिलाफ चालान भी कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. बहरहाल अब सरकार ने फिर से पुलिस को आदेश जारी किए हैं कि वे अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने वालों के चालान करें. पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 3 अगस्त 2018 को नो हॉकिंग कैंपेन मनाली और शिमला से शुरू किया था. इसके बाद वाहन चालकों को जागरूक करने का सिलसिला भी शुरू हुआ, लेकिन अभी तक कोई खास असर नहीं दिख रहा है. विशेष सचिव पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी डीसी राणा ने कहा कि अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने से आम लोगों को भी दिक्कतें होती हैं. शिमला और मनाली में ध्वनि प्रदूषण भी ज्यादा है. ऐसे में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ अब मोटर वाहन अधिनियम में दी गई शक्तियों के तहत चालान करने के पुलिस को आदेश दिए गए हैं.

जाम लगने के बाद शुरू हो जाता है हॉर्न बजाने का का सिलसिला


डीजे या स्पीकर से ध्वनि प्रदूषण करने पर होगी कार्रवाई

गाड़ियों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के अलावा डीजे या स्पीकर से किए जाने वाले ध्वनि प्रदूषण की शिकायत आम लोग भी सीधे विभाग को कर सकते हैं. इसके लिए पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एक मोबाइल एप्प भी तैयार की है, जिसे शोर नहीं नाम दिया गया है. इस एप्प के जरिए उस स्थान का साउंड लेवल
रिकॉर्ड करके विभाग को भेजा जा सकता है.
नर्वस सिस्टम पर होता है असर


गौरतलब है कि एक इंसान की सुनने की सहनशक्ति 55 से 60 डेसिबल होती है. 60 से अधिक डेसिबल को शोर या ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है. ज्यादा शोर पूरे नर्वस सिस्टम पर दुष्प्रभाव डालता है. हालांकि सरकार शिमला और मनाली के बाद अब दूसरे शहरों में भी नो हॉकिंग कैंपेन शुरू करने की बात कह रही है, लेकिन सवाल यह है कि शिमला और मनाली में कब तक ध्वनि प्रदूषण रुकेगा.

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First published: February 2, 2020, 2:29 PM IST
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