हिमाचल में PPE Kit के बाद वेंटिलेटर खरीद में ‘गड़बड़ी’ का आरोप, जांच कमेटी गठित
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हिमाचल में PPE Kit के बाद वेंटिलेटर खरीद में ‘गड़बड़ी’ का आरोप, जांच कमेटी गठित
तीन सदस्यीय समिति घटना की जांच करेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खरीद प्रक्रिया में अनियमितता की खबर सामने आने के बाद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग (Health Department) चौकस हुआ और कमेटी का गठन किया है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में पीपीई किट्स (PPE Kits) खरीद में घूसखोरी मामले के बाद अब महंगे दामों पर वेंटिलेटर (Ventilator) खरीदने के आरोप लगे हैं. हिमाचल स्वास्थ्य विभाग ने अब इस मामले में रिकॉर्ड (Record) तलब किया है. साथ ही जांच कमेटी गठित की है. यह कमेटी 10 दिन में पूरी रिपोर्ट देगी. इस पूरे मामले पर हिमाचल स्वास्थ्य विभाग (Himachal Health Department) ने एक स्पष्टीकरण भी दिया है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि विभाग के ध्यान में आया है कि स्वास्थ्य विभाग में वेंटिलेटर खरीद के सम्बन्ध में एक शिकायत के आधार पर समाचार प्रकाशित हुआ है. इसमें वेंटिलेटर खरीद के दौरान कथित अनियमितताओं के बारे में उल्लेख किया गया है. इस बारे में निदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) से दस्तावेज के साथ रिपोर्ट तलब की गई है.

खरीद के लिए बनाई थी कमेटी
निदेशक ने स्पष्ट किया कि इन वेंटिलेटरों की खरीद उस समय की गई, जब पूरा देश और प्रदेश कोरोना के संकट से जूझ रहा था. पूरे देश में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार और विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य विभागों का ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की सक्षमताओं को बढ़ाने पर केन्द्रित था, क्योंकि वेंटिलेटर की मदद से कोविड-19 से गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों को बचाया जा सकता है. 28 मार्च, 2020 को उपनिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसमें क्रय किये जाने वाले वेंटिलेटर को तकनीकी मानकों के अनुसार निर्धारित किया और अपनी संस्तुतियों के आधार पर आईसीयू वेंटिलेटर खरीदने की सिफारिश की. निदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं के स्तर पर संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में गठित की गई क्रय समिति ने वेंटिलेटर खरीदने की प्रकिया शुरू की और भारत सरकार के जेम पोर्टल पर उपलब्ध वेंटिलेटर के मूल्य व मानकों का अध्ययन किया.



यह मूल्य दर्शाया था


समिति ने यह पाया कि वेंटिलेटर का मूल्य जेम पोर्टल में 29 मार्च, 2020 को 9.9 लाख रुपये दर्शाया गया है. इसी बीच समिति ने अन्य राज्यों में वेंटिलेटर के क्रय के लिए अपनाई जा रही प्रकिया के बारे में भी अध्ययन किया और पाया कि उड़ीसा मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (उड़ीसा सरकार का उपक्रम) ने यह संस्तुत वेंटिलेटर 20 मार्च, 2020 को क्रय किये थे. उड़ीसा मेडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने 20 वेंटिलेटर कुल 1.83 करोड़ रुपये के क्रय किये थे, जिसमें जीएसटी शामिल नहीं था. विभागीय क्रय समिति ने 10 वेंटिलेटर क्रय करने के आदेश जारी किए, जिनमें से 7 वेंटिलेटर 15 अप्रैल, 2020 को विभाग को प्राप्त हुए थे.

मूल्य में समानता का दावा
स्वास्थ्य निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इसके बाद हरियाणा मेडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने 16 अप्रैल, 2020 वेंटिलेटर की खरीद की और प्रति वेंटिलेटर का मूल्य 10.29 लाख रुपये है, जो हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से वेंटिलेटर की खरीद पर की गई राशि के समान है. निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि आज भी उक्त वेंटिलेटर का मूल्य जेम पोर्टल पर 10.30 लाख रुपये है.

जांच कमेटी का गठन
प्रारम्भिक तौर पर स्वास्थ्य निदेशालय में वेंटिलेटर को क्रय करने की प्रकिया में कोई अनियमितताएं नहीं पाई गई हैं, फिर भी पारदर्शिता के लिए यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले में निदेशक उद्योग व नियन्त्रक स्टोर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए. इस समिति में निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, प्रधानाचार्य आईजीएमसी एवं उप नियन्त्रक, वित्त एवं लेखा चिकित्सा शिक्षा निदेशालय अन्य सदस्य होंगे. यह समिति 10 दिन के भीतर रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी.
First published: June 3, 2020, 6:33 AM IST
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