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HC से राहत: हिमाचल में अब पुरानी दरों पर ही लगेंगे नए बिजली कनेक्शन

हिमाचल में बिजली का बिल.
हिमाचल में बिजली का बिल.

हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड ने नए बिजली मीटर की सिक्योरिटी राशि बढ़ाने सम्बन्धी आदेशों पर जनहित में रोक लगा दी है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में अब पुरानी दरों पर ही बिजली मीटर (Electricity Connection) लगेंगे. हाईकोर्ट (High Court) से इस संबंध में राहत मिली है. हाल ही में सरकार ने नए बिजली कनेक्शन लगाने की फीस में चार गुणा बढ़ौतरी कर दी थी. लेकिन सरकार ने इस फैसले पर अब कोर्ट (Court) से स्थगित कर दिया है.

क्या बोले बिजली मंत्री
हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सुख राम ने बताया कि राज्य में बिजली का मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं से अब पुरानी ही निर्धारित सिक्योरटी राशि ली जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को माननीय उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है. उन्होंने कहा कि बिजली का मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं से ली जाने वाली सिक्योरटी राशि जो बढ़ गई थी उसे माननीय कोर्ट द्वारा सरकार के आग्रह पर स्थगित कर दिया है. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार,मामले की पुनः समीक्षा की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़ें.

जनहित में लगाई गई रोक
बिजली बोर्ड के एक प्रवक्ता ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड ने नए बिजली मीटर की सिक्योरिटी राशि बढ़ाने सम्बन्धी आदेशों पर जनहित में रोक लगा दी है. इस बारे में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की परेशानियों को समझते हुए और इस बारे में संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में पुनर्विचार सम्बन्धी याचिका बोर्ड ने दायर की थी, जिसका निर्णय शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दे दिया है. उच्च न्यायालय ने बोर्ड की इस याचिका पर हिमाचल विद्युत नियामक आयोग को पुनर्विचार करने सम्बन्धी आदेश सुनाएं हैं.



क्या था पूरा मामला
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के बद्दी जिले में एक कंपनी बिजली विभाग को 100 करोड़ रुपये का चुना लगा कर चली गई थी. बिजली विभाग ने इस संबंध में हाईकोर्ट में मामले में याचिका दाखिल की थी. इसके बाद कोर्ट ने विभाग को सिक्योरिटी दरें तय करने को कहा था और विभाग ने फिर नए मीटर लगाने के लिए फीस चार गुणा बढ़ा दी थी, ताकि कोई कंपनी बाद में बिल अदा ना करे तो सिक्योरिटी से भरपाई की जा सके. लेकिन फीस बढ़ाने को लेकर काफी हंगामा हुआ था और अब यह आदेश वापस लिया गया है.
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