खुशखबरी: हिमाचल में Snow Leopard की संख्या बढ़ी, तेंदुए भी हुए 761

बर्फानी तेंदुआ हिमाचल के बर्फीले पहाड़ों की गोद में बसता है. कभी एक बर्फीले तेंदुए की सूरत देखने के लिए हिमाचल तरस गया था. लेकिन अब हिमाचल में स्नो लैपर्ड की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है.

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 10:17 PM IST
खुशखबरी: हिमाचल में Snow Leopard की संख्या बढ़ी, तेंदुए भी हुए 761
हिमाचल में 100 से ज्यादा हो चुके हैं स्नो लैपर्ड.
Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 29, 2019, 10:17 PM IST
29 जुलाई विश्व टाइगर दिवस के रूप में मनाया गया. टाइगर को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी मुहिम छिड़ी है. बेशक हिमाचल में टाइगर नहीं होते. लेकिन यहां का राजा बर्फानी तेंदुआ है, जिसकी संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. यह प्रदेश के लिए खुशखबरी है. बर्फानी तेंदुआ हिमाचल के बर्फीले पहाड़ों की गोद में बसता है. कभी एक बर्फीले तेंदुए की सूरत देखने के लिए हिमाचल तरस गया था. लेकिन अब हिमाचल में स्नो लैपर्ड की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है. वन्य प्राणी विभाग ने लाहौल स्पीति और प्रदेश के कुछ और बर्फीले भागों में स्नो लैपर्ड की तस्वीरें खुफिया कैमरों से रिकॉर्ड किए हैं. वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है.

वन मंत्री के अनुसार स्नो लैपर्ड की संख्या 100 के पार हो गई है. इसी तरह सामान्य लैपर्ड की संख्या भी बढ़ी है. वर्तमान में प्रदेश में 761 सामान्य तेंदुए हैं. एक अनुमान के मुताबिक तीन-चार वर्षों से इनकी संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि प्रदेश के चिड़ियाघरों में 37 टाइगर हैं.

पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे स्नो लैपर्ड

100 से ज्यादा हो चुके हैं स्नो लैपर्ड, सामान्य लैपर्ड की संख्या हुई 761


लाहौल-स्पीति के बर्फ से ढके भागों में स्नो लैपर्ड आसानी से दिखने शुरू हो गए हैं. एक समय था जब स्नो लैपर्ड या लैपर्ड से लोग डरते थे. स्नो लैपर्ड गांव में घुस जाता था और पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाता था. इस कारण लोगों ने इन्हें मारना शुरू कर दिया था. लेकिन अब लोगों की सोच में बदलाव आ गया है. वन विभाग के विश्लेषण के मुताबिक लाहौल स्पीति में स्नो लैपर्ड पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बनते जा रहे हैं. इस कारण लोग इनका शिकार नहीं कर रहे हैं. वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि स्नो लैपर्ड वन्य जीवन के लिए भी उपयुक्त हैं और लोगों के रोजगार का भी इस तरह से जरिया बन रहे हैं. मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को पांच करोड़ रुपये का एक और प्रोजेक्ट स्नो लैपर्ड के बचाव के लिए भेजा है.

वैसे तो हिमाचल में टाइगर नहीं हैं. लेकिन कई बार उत्तराखंड के सिंबलवाड़ा क्षेत्र से टाइगर प्रदेश के सरहदों के भीतर आ जाते हैं. इसी तरह से हाथी के कदमों के निशान भी देखे गए हैं. इसलिए सरकार ने इस विषय को केंद्र से उठाने का फैसला किया है ताकि अगर ये यहां आ भी जाएं तो इन्हें प्रदेश में ही पनाह मिले. बहरहाल स्नो लैपर्ड और सामान्य लैपर्ड का बढ़ना सूबे के पहाड़ों और जंगलों की शान बढ़ाने वाला है. लेकिन वन विभाग की भी जिम्मेदारी बढ़ेगी ताकि इनका कोई शिकार न कर सके.

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First published: July 29, 2019, 10:00 PM IST
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