Exclusive: शिमला में शव की फिर बेकद्री! IGMC के बाहर ‘लावारिस’ पड़ा रहा कोरोना संदिग्ध का शव
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Exclusive: शिमला में शव की फिर बेकद्री! IGMC के बाहर ‘लावारिस’ पड़ा रहा कोरोना संदिग्ध का शव
शिमला में आईजीएमसी के बाहर पड़ी लाश.

इससे पहले भी कोरोना मरीज के शव को जलाने को लेकर शिमला में विवाद हो चुका है. एसडीएम ने नगर निगम पर आरोप लगाया था कि उसका कोई कर्मी देर रात शव जलाने नहीं पहुंचा था.

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शिमला. दुनिया भर में जहां कोरोना को लेकर सावधानी बरती जा रही है. वहीं. हिमाचल प्रदेश में लगता है कि स्वास्थ्य विभाग इस वायरस को हल्के में ले रहा है. तभी तो एक कोरोना संदिग्ध का शव सूबे के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर लावारिस हालात में कई घंटे पड़ा रहा. ऐसे में आईजीएमसी शिमला में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है.

ये है पूरा मामला
दरअसल, बिलासपुर जिले में क्वारंटीन सेंटर में 26 साल के युवक को दौरा पड़ा था. युवक कुछ दिन पहले दिल्ली गया था और बिलासपुर आ रहा था तो स्वारघाट में उसे क्वारंटीन किया गया था. रविवार को हालत बिगड़ने पर उसे बिलासपुर अस्पताल ले जाया गया. जहाँ से उसे आईजीएमसी रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में युवक की मौत हो गई. अस्पताल पहुंचने पर एम्बुलेंस ने शव को परिसर किनारे उतारा और चली गई.

छह घंटे तक ऐसे ही पड़ा रहा शव
रविवार देर रात से लेकर सुबह 3 बजे तक शव आईसोलेशन वार्ड के बाहर रहा. तीमारदारों ने भी शव को उठाने से मना कर दिया था और ना ही अस्पताल से किसी ने शव को उठाया. सुबह जब लोगों ने अस्पताल के किनारे शव को पड़े देखा तो सबके होश उड़ गए और अस्पताल में हड़कम्प मच गया. मामला आईजीएमसी और पुलिस तक पहुंचा तो उसके बाद नौ बजे सफाई कर्मी ने शव को शव ग्रह में रखा.



यह बोले अधिकारी
आईजीएसमी के प्रशानिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि बिलासपुर से एक ब्रॉड डेड आया था. गुप्ता ने बताया कि जो भी इस तरह के ब्रॉड डेड आते हैं, उसके बारे में सीएमओ, केजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर से सम्पर्क कर शव ग्रह में रखा जाता है.

यह बोले आईजीएमसी के एमएस

आईजीएमसी के एमएस डॉक्टर जनक ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी. यहां पहुंचने से पहले ही संदिग्ध की मौत हो चुकी थी. बिलासपुर प्रशासन ने मरीज़ को भेजने की कोई जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने बताया कि सुबह करीब तीन बजे मामले की सूचना मिली थी. अब संदिग्ध की कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आई है. शव का पोस्टमार्टम करने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा.

यह बोले युवक के मामा
युवक के मामा सोनू ने बताया कि रात तीन बजे तक आईजीएमसी के बाहर डेड बॉडी एंबुलेंस में रखी थी. साढ़े पांच तक ऐसे ही चलता रहा. फिर एंबुलेंस कर्मियों ने डेड बॉडी को रैपअप किया और छोड़ कर चले गए. इसके बाद अस्पताल की एक नर्स ने उन्हें ही डेडबॉडी उठाने कहा, लेकिन उनके पास पीपीआई किट नहीं थी. इसलिए ब़ॉडी नहीं उठाई. बाद में नौ बजे तक ब़ॉडी ऐसी ही पड़ी रही और सफाई कर्मियों ने ब़ॉडी को उठाया.

पहले भी हो चुका है विवाद
बता दें कि इससे पहले भी कोरोना मरीज के शव को जलाने को लेकर शिमला में विवाद हो चुका है. एसडीएम ने नगर निगम पर आरोप लगाया था कि उसका कोई कर्मी देर रात शव जलाने नहीं पहुंचा था. स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने शव जलाया. यहां तक कि शव को जलाने के लिए डीजल का इस्तेमाल किया गया. इस पर जमकर विवाद हुआ है. क्योंकि अंतिम संस्कार के दौरान गाइडलाइंस को फोलो नहीं किया गया था.

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