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हिमाचल: 300 मेगावाट जिस्पा बिजली प्रोजेक्ट के लिए फिर कवायद, पाकिस्तान भी जता चुका है आपत्ति

हिमाचल: 300 मेगावाट जिस्पा बिजली प्रोजेक्ट के लिए फिर कवायद, पाकिस्तान भी जता चुका है आपत्ति

लाहौल घाटी का जिस्पा इलाका. (File Photo)

लाहौल घाटी का जिस्पा इलाका. (File Photo)

Jisjpa Power Project: हिमाचल पावर कारपोरेशन के अधिकारी लगातार केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे हैं. इसके बाद ही तय हुआ है कि प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण व इन्वेस्टीगेशन का काम दोबारा से किया जाएगा

शिमला. हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के जिस्पा (Jispa Hydro Project) में 300 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट (Project) के निर्माण के लिए फिर से कवायद शुरू हो गई है. इस बिजली परियोजना के लिए फिर से इन्वेस्टीगेशन सर्वे हेागा. राष्ट्रीय महत्व की जिस्पा बांध (Jispa Dam) परियोजना के निर्माण के लिए नए सिरे से सर्वेक्षण किया जाएगा.

नई एजेंसी की तलाश
जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार इसके लिए नई एजेंसी ढूंढ़ेगी और ताकि नए सिरे से बांध और पावर प्रोजेक्ट का निर्माण किया जा सके. राष्ट्रीय महत्व का यह प्रोजेक्ट लंब समय से लटका है. परियोजना को लेकर जिस्पा के लोग भी विरोध कर रहे हैं. बता दें कि इस प्रोजेक्ट का विरोध
पाकिस्तान भी जता चुका है.

केंद्र देगा फंड, लेकिन प्रोजेक्ट को हरी झंडी के बाद
परियोजना के लिए केंद्र सरकार फंडिंग देगी, लेकिन जब तक प्रोजेक्ट पूरी तरह से क्लीयर नहीं हो जाता, तब तक केंद्र सरकार की ओर से से पैसा जारी नहीं किया जाएगा.

पाकिस्तान ने भी जताया है विरोध
परियोजना के निर्माण को लेकर पाकिस्तान से भी विरोध जता चुका है. क्योंकि चिनाब बेसिन यानी चंद्रभागा नदी पर जिस्पा परियोजना बननी है और इसका पानी पाकिस्तान जाता है. भारत-पाक ट्रीटी के मुताबिक, भारत यहां पर पानी नहीं रोक सकता. इसे देखने के लिए एक बार पाकिस्तान की टीम भी यहां आई थी.

पानी स्टोर करने की योजना
भारत सरकार चाहती है कि जिस्पा में एक बड़ा भंडारण टैंक बनाए, ताकि पानी को स्टोर किया जा सके. इस भंडारित पानी से हिमाचल 300 मैगवाट क्षमता की बिजली परियोजना का निर्माण करेगा. हिमाचल पावर कारपोरशन को यह प्रोजेक्ट दिया गया है.

अफसर केंद्र से कर रहे बात
हिमाचल पावर कारपोरेशन के अधिकारी लगातार केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे हैं. इसके बाद ही तय हुआ है कि प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण व इन्वेस्टीगेशन का काम दोबारा से किया जाएगा, ताकि यहां पर कोई दूसरा स्थान ढूंढ़ा जाए जिसमें यहां के लोगों को कोई एतराज न हो. हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन के एमडी देवेश कुमारने बताया कि परियोजना के लिए अब नए सिर से इन्वेस्टीगेशन सर्वे किया जाएगा और फिर निर्माण कार्य शुरू करने के बारे में फैसला होगा. यह प्रोजेक्ट भारत सरकार का उपक्रम है.

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Tags: Electricity, Himachal pradesh, Hydrogen, Shimla

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