Black Fungus: हिमाचल में एक और केस, IGMC में महिला का हुआ ऑपरेशन, आंख निकाली

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Black Fungus in Himachal: आईजीएमसी में ब्लैक फंगस (Black Fungus) से पीड़ित हमीरपुर की महिला की सर्जरी की पुष्टि प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने की है. हिमाचल में अब तक ब्लैक फंगस के कुल 16 मामले रिपोर्ट हुए हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस (Black Fungus) के मामले अब बढ़ने लगे हैं. आईजीएमसी शिमला (IGMC Shimla) में ब्लैक फंगस का नया मामला सामने आया है. शुक्रवार को शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से नया केस रिपोर्ट हुआ है. वहीं, आईजीएमसी शिमला में दाखिल ब्लैक फंगस से पीड़ित महिला की बाई आंख की सर्जरी की गई है. डॉक्टरों का कहना है कि यह फंगस महिला की आंख में अंदर तक फैल गया था.इसके बाद सर्जरी के दौरान महिला की बाईं आंख को निकाल दिया गया है. यह महिला अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में है. आईजीएमसी में ब्लैक फंगस (Black Fungus) से पीड़ित हमीरपुर की महिला की सर्जरी की पुष्टि प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने की है. हिमाचल में अब तक ब्लैक फंगस के कुल 16 मामले रिपोर्ट हुए हैं.

नए मरीज को कोविड नहीं

शुक्रवार को ब्लैक फंगस का अस्पताल में एक नया मामला सामने आया है. यह मरीज रोहड़ू का रहने वाला है.मरीज का नाक अंदर से सड़ चुका है.कई बार नाक से खून निकलने की शिकायत भी मरीज ने की है. इसके अलावा मरीज के तालू में छाले की शिकायत भी थी. यह मरीज डायबिटिक है. डॉक्टर और मरीज का सीटी स्कैन और एमआरआई टेस्ट भी करवा रहे हैं. हालांकि, मरीज को कोविड नहीं था, लेकिन अस्पताल में आने के बाद मरीज का सैंपल जांच के लिए लैब भेजा है.बताया जा रहा है कि शनिवार को मरीज की सर्जरी अस्पताल में की जा सकती है.

अब तक कितने केस
हिमाचल में ब्लैक फंगस के आईजीएमसी शिमला में अब तक 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें से अकेले हमीरपुर से छह, सोलन से दो और एक मरीज शिमला से सामने आया था. 10 में से दो मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं, टांडा मेडिकल कॉलेज में भी ब्लैक फंगस के छह मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से दो मरीजों की मौत हो चुकी है.

क्‍या है म्‍यूकरमाइकोसिस

यह बीमारी फफूंद के एक समूह के कारण होती है, जिसे म्यूकरमाइसेट्स (Mucormycetes) कहा जाता है, जो पूरे पर्यावरण (Environment) में पनपता है. यह फंगस का एक परिवार है, जो आपके मस्तिष्‍क में जाकर एयर स्‍पेस में एकत्र हो सकते हैं. जब प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें नियंत्रण में नहीं रख सकती है तो वे मस्तिष्क के आधार पर आक्रमण करते हैं, जहां यह एक वास्तविक समस्या बन जाती है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि संक्रमण संक्रामक नहीं है और पूरी तरह से एक ऑपरेशन के माध्यम से हटाया जा सकता है.

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