केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट ऊना-हमीरपुर रेल लाइन को बजट में मिले सिर्फ 1000 रुपये!

ऊना और हमीरपुर रेल लाइन के लिए बजट.

ऊना और हमीरपुर रेल लाइन के लिए बजट.

‌Una Hamirpur Railway Line Project: ऊना से हमीरपुर तक 50 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए उत्तर रेलवे ने पहली बार 2016 में रिपोर्ट सबमिट की थी. बाद में 2850 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2018 में फाइनल लोकेशन सर्वे का टेंडर अवार्ड हुआ था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 10:36 AM IST
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शिमला. वित्‍त वर्ष 2021-22 के लिए पेश किए गए यूनियन बजट (Union Budget) में हिमाचल (Himachal Pradesh) के हाथ खाली रहे हैं. जहां एक तरफ राजस्व घाटा अनुदान में भारी कटौती की गई है. वहीं, रेलवे बजट में भी हिमाचल को कुछ नहीं दिया गया है. एक बार फिर से हिमाचल को निराशा हाथ लगी है.

हैरानी कि बात तो यह है कि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट ऊना-हमीरपुर रेलवे लाइन के लिए केंद्रीय बजट में मात्र 1000 रुपये ही मिले हैं. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को जिंदा रखने के लिए ऐसा किया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की डीपीआर अभी तक कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स से अप्रूव नहीं हो पाई है. वहीं, सामरिक महत्व की भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन के लिए बजट में 405 करोड़ और चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन को वर्ष 2021-22 के लिए 200 करोड़ रुपये मिले हैं. यह जानकारी उत्तर रेलवे ने अपनी बजट बुक और वेबसाइट पर जारी की है. हालांकि, मीडिया में मामला आने के बाद अब उत्‍तर रेलवे ने इसे बुकलेट और अब अपनी बेबसाइट से हटा दिया है.

ऊना से हमीरपुर तक 50 किलोमीटर लंबी रेल लाइन
दरअसल, ऊना से हमीरपुर तक 50 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए उत्तर रेलवे ने पहली बार 2016 में रिपोर्ट सबमिट की थी. बाद में 2850 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2018 में फाइनल लोकेशन सर्वे का टेंडर अवार्ड हुआ. प्रोजेक्ट की डीपीआर कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स कमेटी (सीसीए) से अप्रूवल मिलने के बाद ही इसके निर्माण के लिए बजट जारी होना था, लेकिन सीसीए से मंजूरी न मिलने के कारण इस प्रोजेक्ट को मात्र जिंदा रखने के लिए इस बजट में 1 हजार रुपये मिले हैं.

राजस्व घाटे में भी कटौती

इसी तरह हिमाचल को केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान में भी बजट में कटौती की गई है. इस वित्तीय साल के मुकाबले अगले साल के लिए प्रदेश को 631 करोड़ रुपये कम मिलेंगे. वहीं, अगले पांच साल के लिए भी इस अनुदान में भारी कटौती की गई है.
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