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स्मार्ट सिटी शिमला: पार्षदों के मनसूबों पर पानी, 2906 करोड़ में से सिर्फ 197 करोड़ होंगे खर्च

शिमला शहर . (सांकेतिक तस्वीर)
शिमला शहर . (सांकेतिक तस्वीर)

बता दें कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर भले ही निगम पार्षद वार्डों में विकासकार्यों की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन दबी जुबान में पार्षद भी विकासकार्यों का समय पर शुरु न होने का रोना रो रहे हैं.

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शिमला. स्मार्ट सिटी शिमला (Smart City Shimla) को स्मार्ट सिटी में शामिल हुए भले ही तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर शिमला में धरातल पर अब तक एक भी कार्य दिखाई नहीं दे रहा है. स्मार्ट सिटी शिमला (Shimla) के लिए अब तक केंद्र और राज सरकार से एक सौ करोड़ का प्रावधान भी हो चुका है, लेकिन नगर निगम (Municipal Corporation) शिमला स्मार्ट सिटी के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं कर पाया है. काम धरातल पर न उतर पाने से निगम पार्षदों के मनसूबों पर भी पानी फिरता दिखाई दे रहा है. स्मार्ट सिटी से उम्मीद लगाए बैठे पार्षद भी दबी जुबान में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.

स्मार्ट सिटी का कार्य जल्द: महाप्रबंधक
स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक नितिन गर्ग ने बताया कि स्मार्ट सिटी का कार्य जल्द ही धरातल पर दिखाई देने जा रहा है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक 28 प्रोजेक्ट कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया कर दी जाएगी. उसके बाद कार्यों को अमलीजामा पहनाया जाएगा. स्मार्ट सिटी कि बीओडी की बैठक में प्रोजेक्ट कार्यों को मंजूरी मिली है, जिसमें पार्किंग, पैदल फूटपाथ, फूटओवर ब्रिज, एस्केलेटर व तहबाजारियों के लिए वैंडिंग जोन समेत इ-टॉयलेट और सीसीटीवी स्थापित किए जाएंगे.

इतने करोड़ का प्रोजेक्ट
उन्होंने बताया कि 2906 करोड़ रुपए के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत एबीडी यानी एरिया बेस्ड डेवेलपमेंट और पैन सिटी के तहत कार्य होने हैं, जिसके तहत पैन सिटी में करीब 197 करोड़ रुपए से शहर के विकासकारी होने हैं, जबकि बाकि रुपयों से एबीडी प्रोजेक्ट से शहर में कार्य होने हैं. उन्होंने बताया कि पैन सिटी में होने वाले कार्य में सबसे पहले स्मार्ट सिटी रांची और शिमला के बीच स्थापित होने वाला कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, ताकि दोनों शहरों के बीच होने वाले कार्यों को एक दूसरे के साथ साझा किया जा सके.



सुनियोजित तरीके से बसाएंगे तीन वॉर्ड
उन्होंने बताया कि एबीडी प्रोजेक्ट के तहत शहर के तीन वार्डों को नए और सुनियोजित तरीके से बसाया जायेगा, जिसमें सभी स्मार्ट कार्य किए जाएंगे. स्मार्ट सिटी में रामबाज़ार, लोअर बाज़ार और कृष्णानगर वार्ड में एस्केलेटर, ऐलीवेटर और स्कॉय वाक के साथ स्मार्ट फूटपाथ और स्मार्ट बस स्टॉप बनाने की योजना है, जिस पर 2906 करोड़ में से बजट खर्च किया जाएगा.

पार्षदों की परेशानी
बता दें कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर भले ही निगम पार्षद वार्डों में विकासकार्यों की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन दबी जुबान में पार्षद भी विकासकार्यों का समय पर शुरु न होने का रोना रो रहे हैं. निगम पार्षदों का कहना है कि करीब तीन साल से उनके वार्डों में होने वाले विकासकार्य फाइलों में ही दफन हो गए हैं, लेकिन निगम के अधिकारी उन्हें स्मार्ट सिटी का हवाला दे रहे हैं. स्मार्ट सिटी में होने वाले कार्यो की हकीकत कुछ और ही दिखाई दे रही है.
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