बड़ा सवाल: जहर देकर बंदरों को मारने वाले हिमाचल में ‘गर्भवती हथिनी की हत्या’ पर मातम क्यों?
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बड़ा सवाल: जहर देकर बंदरों को मारने वाले हिमाचल में ‘गर्भवती हथिनी की हत्या’ पर मातम क्यों?
शिमला में आइसक्रीम खाता बंदर. (FILE PHOTO)

हिमाचल में सरकार एक बंदर पकड़ने के लिए 1 हजार रुपये भी देती है. प्रदेश में करीब 3 लाख बंदर हैं. बता दें कि हिमाचल में बंदरों की नसबंदी के लिए आठ केंद्र हैं. 2019 तक करीब 1 लाख 57 हजार बंदरों की नसबंदी की गई थी.

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शिमला. केरल में गर्भवती हथिनी (Kerala Pregnant Elephant Death) की मौत पर पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूटा है. सोशल मीडिया (Social Media) में इसे लेकर लोग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. साथ ही इस कृत्य को अंजाम देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. लेकिन इस बीच बड़ा सवाल यह है कि हिमाचल प्रदेश (Himachal) में हथिनी की मौत पर लोग ‘आंसू’ बहाने वाले लोग बंदरों को मारने की इजाजत का विरोध क्यों नहीं करते हैं? क्यों हिमाचल (Himachal) के लोग बंदरों और अन्य जंगली जानवरों का शिकार (Hunting) करते हैं और बंदूक के साथ अपनी ‘मर्दानगी’ और शौर्य’ की फोटो सोशल मीडिया पर डालते हैं.

कुफरी में बंदरों को जहर देकर मारा गया

साल 2019 में तो शिमला में बदंरों को लोगों ने मारना शुरू कर दिया था. यहां बंदरों को खाने में जहर देने की खबरें और कुछ वीडियो भी सामने आए थे. हाल ही में बीते मई माह शिमला के समीप कुफरी में बंदरों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया था. कुफरी के महासू पीक में नौ मरे हुए बंदर मिले थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बंदरों के पोस्टमार्टम में इनके जहर देकर मारने की बात सामने आई है। हालांकि किसने इनको जहर दिया है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है. वन विभाग ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था. इससे पहले भी शिमला शहर में भी बंदरों के जहर देकर मारने के मामले सामने आ चुके हैं, कुछ माह पहले शिमला के विभिन्न इलाकों में एक सौ से अधिक बंदर मरे हुए मिले थे. हालांकि, इससे पहले, शिमला में बंदर वर्मिन घोषित थे और इन्हें मारने की इजाजत थी.



2020 के लिए 91 तहसीलों में बंदरों को मारने की अनुमति
हिमाचल प्रदेश में बंदरों (Monkey) को अब केंद्र सरकार ने बंदरों को वर्मिन घोषित किया है. इस घोषणा के बाद अब लोग बंदरों को मार सकते हैं, लेकिन वे बंदरों को केवल अपनी निजी भूमि (Land) पर ही मार सकते हैं, जबकि वन भूमि (Forest Land) पर इनके शिकार पर पाबंदी रहेगी. सूबे की कुल 91 तहसीलों में बंदरों को मारने की अनुमति दी गई है. मंडी जिला की 10 तहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित कर दिया गया है,

बंदर पकड़ने के पैसे भी देती है सरकार

हिमाचल में सरकार एक बंदर पकड़ने के लिए 1 हजार रुपये भी देती है. प्रदेश में करीब 3 लाख बंदर हैं. बता दें कि हिमाचल में बंदरों की नसबंदी के लिए 8 केंद्र हैं. 2019 तक करीब 1 लाख 57 हजार बंदरों की नसबंदी की गई थी. दरसअल, लोगों का कहना है कि बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और शहरी इलाकों में लोगों को बंदरों द्वारा काटने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं. ऐसे में उन्हें बंदरों को मारने की इजाजत दी जाए. शिमला में रोजाना आठ से दस मामले बंदरों के काटने के सामने आते हैं.

शिमला के मॉल रोड पर बंदरों का झुंड (FILE PHOTO)
शिमला के मॉल रोड पर बंदरों का झुंड (FILE PHOTO)


काटने के मामले भी बढ़े, पांच साल का आंकड़ा

जुलाई 2019 तक के आंकड़े के अनुसार, शिमला के आईजीएमसी में अस्पताल में साल 2015 में 430 मामले बंदरों के काटने दर्ज हुए थे. साल 2016 में मामले बढ़कर 626 हो गए. साल 2017 में मामलों में कुछ और बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 649 पहुंच गया. बीते साल 2018 में 742 लोगों को बंदरों ने काटा था. साल 2019 जून तक बंदरों के काटने के 366 मामले सामने आए थे.

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