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कर्नाटक की पदमा के लिए भाषा बनी बाधा, मानसिक रोगियों के बीच बिताना पड़ा लंबा समय

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 29, 2019, 7:04 PM IST
कर्नाटक की पदमा के लिए भाषा बनी बाधा, मानसिक रोगियों के बीच बिताना पड़ा लंबा समय
मानसिक रोगियों के अस्पताल में कर्नाटक की पदमा को इसलिए रहना पड़ा क्योंकि उसकी भाषा किसी को समझ में नहीं आई.

शिमला के मानसिक रोगियों (Mental Behavior Hospital) के अस्पताल में कर्नाटक की पदमा (Padma of Karnataka) को इसलिए रहना पड़ा क्योंकि उसकी भाषा (Language Barrier) किसी को समझ में नहीं आई. अस्पताल प्रशासन ने संस्था से संपर्क किया और आज संस्था अपने साथ 12 मरीजों को ले जा रही है, जिसमें 6 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं.

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शिमला. शिमला के बालूगंज में प्रदेश का एक मात्र मानसिक रोग व पुनर्वास अस्पताल (Mental Disease & Rehabilitation Hospital) स्थित है. यहां पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के भी मानसिक रोगियों (Mental Patients) का इलाज चल रहा है. इनमें से अधिकतर मरीज ऐसे हैं, जो अपने परिवार से बिछड़ चुके हैं और किसी तरह भटकते हुए हिमाचल पहुंचे हैं. इन मरीजों के परिवार के बारे में अस्पताल को भी ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि कुछ मरीजों की भाषा को समझना मुश्किल है और कुछ की हालत ही ऐसी नहीं है कि वो बता सकें कि उनका घर कहां हैं. ऐसे में 'श्रद्धा' (Shradha) उनके लिए उम्मीद की किरण बन कर आई है. अस्पताल में कर्नाटक की पदमा का भी इलाज चल रहा था जिसकी भाषा नहीं सझने के चलते उसे दो साल तक मानसिक रोगियों के बीच में रहना पड़ा था और उसकी भाषा समझने के बाद ये पता चला था कि वह मानसिक रोगी नहीं है, बस भाषा नहीं समझ पाने के कारण उसे लंबे समय तक रोगियों के बीच बिताना पड़ा था.

कर्नाटक की पदमा यहां भाषा की दिक्कत के चलते रह रही थी

श्रद्धा के सदस्य दीनानाथ का कहना है कि प्रदेश के एक मात्र मानसिक रोग एवं पुनर्वास अस्पताल में देश भर के मानसिक रोगियों को इलाज चल रहा है. ऐसे में श्रद्धा संस्था जैसी संस्था की आवश्यकता हिमाचल में भी है ताकि मरीजों का इलाज बेहतर तरीके से हो सके और मरीजों को उनके परिवार से भी मिलाया जा सके.

यह संस्था 1988 में मुम्बई में बनी थी

श्रद्धा नाम की यह संस्था 1988 में मुम्बई में बनी थी. यह तब से लेकर मानसिक रूप से उपेक्षित समूहों, सड़क किनारे बेसहारा भटकने वाले लोगों के उपचार, कस्टोडियल देखभाल और पुनर्वास प्रदान करने और उन्हें उनके खोए हुए परिवारों के साथ फिर से जोड़ने के लिए काम कर रही है. अस्पताल प्रशासन ने संस्था से संपर्क किया और आज संस्था अपने साथ 12 मरीजों को ले जा रही है, जिसमें 6 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं.

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शिमला के बालूगंज में प्रदेश का एक मात्र मानसिक रोग व पुनर्वास अस्पताल स्थित है.


संस्था अब तक इस अस्पताल से 26 मरीजों को अपने साथ ले जा चुकी है
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शिमला के मानसिक रोग व पुनर्वास अस्पताल के डॉ. एमएस का कहना है कि संस्था अब तक इस अस्पताल से 26 मरीजों को अपने साथ ले जा चुकी है जिनमें से 23 मरीजों को सफलतापूर्वक उनके परिवार से मिलाया जा चुका है. वहीं तीन मरीजों के परिवार ट्रैक नहीं होने के चलते उन्हें शैल्टर होम्स में रखा गया है. संस्था ऐसे मरीजों के पुनर्वास का काम करती है और परिवार से मिलाती है, जिनकी स्थिति नियंत्रण में होती है और जो परिवार के साथ रहने की स्थिति में होते हैं.

चार सदस्यीय टीम शिमला पहुंची

संस्था की टीम मरीजों को यहां से अपने साथ ले जाकर मुंबई स्थित संस्थान में मरीजों को रखेगी. मरीजों को साथ ले जाने के लिए चार सदस्यीय टीम शिमला पहुंची है. मुंबई पहुंचने पर मरीजों से उनकी सूचना लेकर उनके परिवारों का ट्रैक किया जाएगा. संस्था के पास हर राज्यों के लोग जुड़े हुए हैं. ऐसे में मरीजों के परिवार को ढूंढने के लिए भाषा भी बाधा नहीं बन पाती है.

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First published: November 29, 2019, 7:00 PM IST
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