Corona क्या है: पहाड़ों की रानी में बेफिक्र हैं सब, 'यहां न दो गज दूरी, न मास्क है जरूरी'

शिमला में जनता को कोरोना की कोई कोई फिक्र नहीं. जैसे महामारी है ही नहीं.

शिमला में जनता को कोरोना की कोई कोई फिक्र नहीं. जैसे महामारी है ही नहीं.

What is Corona: Himachal Pradesh Capital; Mountain Queen Shimla; यहां कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ती हैं. यहां न दो गज की जरूरी है और न मास्क. एसपी का कहना है पुलिस का मकसद जान बचाना है. पर कैसे?

  • Last Updated: April 18, 2021, 9:13 AM IST
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शिमला. देश में भले ही कोरोना ने हाहाकार मचा रखा हो, लेकिन हिमाचल की राजधानी शिमला में भी इसको लेकर उल्टी गंगा बह रही है. यहां माल रोड और रिज मैदान के अलावा लगभग हर हिस्से में कोरोना की किसी भी तरह की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा.

News 18 के कैमरों में कैद तस्वीरों को देखकर तो लग रहा है कि ‘न दो गज की दूरी जरूरी है, न ही मास्क है जरूरी.’  गौरतलब है कि हाल ही में नगर निगम के चुनावों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों से लेकर विपक्षी और अन्य नेताओं की जो तस्वीरें निकल कर आईं, उन पर जनता टूट पड़ी. जनता ने मास्क न पहनने और आपसी दूरी न होने पर सोशल मीडिया पर जमकर गुबार निकाला. हालांकि, जनता खुद ही नेताओं की राह पर चल पड़ी है.

हर कोने में पहन रहे गलत मास्क

शिमला में शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो, जहां लोग गलत तरीके से मास्क न पहनते हों. स्थानीय लोगों के साथ-साथ ज्यादातर पर्यटक भी बिना मास्क के लिए सड़कों पर नजर आ रहे हैं. गली-कूचे से लेकर बाजारों में भीड़ है. ‘नो मास्क नो सर्विस’ वाला नियम न ग्राहक और न ही दुकानदारों पर लागू हो रहा है. सरकारी कर्मचारी भी इसका पालन करते नहीं दिखाई दे रहे.
हमारा मकसद चालान काटना नहीं, जान बचाना है- SP

जो लोग मास्क पहन रहे हैं वो पुलिस के डर से ही पहन रहे हैं. शहर में हर तीसरा व्यक्ति गलत तरीके से मास्क पहन रहा है. इस मामले को लेकर शिमला SP का कहना है कि चालान करना मकसद नहीं है. लक्ष्य है लोगों को बचाना. लेकिन, इस अपील का भी कोई असर नहीं दिखता.
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