आंखों के 1 लाख ऑपरेशन कर चुके PGI निदेशक पदमश्री डॉ. जगत राम को ‘हिमाचल गौरव पुरस्कार’
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आंखों के 1 लाख ऑपरेशन कर चुके PGI निदेशक पदमश्री डॉ. जगत राम को ‘हिमाचल गौरव पुरस्कार’
सीएम जयराम ठाकुर डॉ. जगत राम को सम्मानित करते हुए.

PGI Director Jagat Singh: साल 1985 में उन्होंने आईजीएमसी शिमला (IGMC Shimla) से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई की. बाद में डॉ. जगत राम ने चंडीगढ़ (Chandigarh) में एमएस की. उनके पांच भाई हैं, जो खेतीबाड़ी करते हैं. डॉ. जगत राम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 15 अवार्ड (Award) मिल चुके हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, चंडीगढ़ (Chandigarh) के निदेशक पदमश्री (Padham Shree Award) डॉ. जगत राम को ‘हिमाचल गौरव पुरस्कार-2019’ से पुरस्कृत किया. डॉ. जगत राम (Dr Jagat Ram) राज्य के जिला सिरमौर की ग्राम पंचायत सेर-जगास के पबियाना गांव के निवासी हैं. डॉ. जगत राम किन्हीं परिस्थितियों के कारण पिछले वर्ष ‘हिमाचल गौरव पुरस्कार’ प्राप्त करने के लिए समारोह में शामिल नहीं हो सके. इस अवसर पर मुख्य सचिव अनिल खाची, सचिव जीएडी देवेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.

किसान के घर पैदा हुए, देखी गरीबी
हल जोत खेतीबाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले सिरमौर जिले के किसान के बेटे को देश के चौथे सबसे बड़े पुरस्कार पद्मश्री से भी नवाजा गया गया है. आर्थिक तंगहाली के बावजूद पीजीआई के निदेशक पद तक पहुंचे डॉ. जगत ने साबित कर दिखाया कि दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत के बूते हर मुश्किल काम भी आसान हो जाता है.

फीस के पैसे नहीं थे
एक समय था जब चंडीगढ़ में एमएस में एडमिशन तो मिली, लेकिन उनमे पास फीस के पैसे नहीं थे. दोस्तों से उधार लेकर उन्होंने एडमिशन फीस भरी. अब वह उसी संस्थान के निदेशक हैं. नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जगत राम मूलत: सिरमौर जिले की सेर जगास पंचायत के पबियाना गांव से हैं.



एक लाख ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड
उनके नाम आंखों के लगभग एक लाख ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड दर्ज हैं. अकेले बच्चों के दस हजार के करीब ऑपरेशन कर उन्हें रोशनी दी है. डॉ. जगत राम ने मोतियाबिंद सर्जरी की पुरानी तकनीक को बदलकर नई एवं उच्च गुणवत्ता वाली सस्ती तकनीक ईजाद की. उन्हें अमेरिकन सोसायटी कैटरेक्ट की ओर से बेस्ट ऑफ द ईयर से भी सम्मानित किया जा चुका है. वर्ष 2017 से पीजीआई के डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. दो दशक पहले उन्होंने पीजीआई में ज्वाइनिंग की थी.

परिवार में पांच भाई
साल 1985 में उन्होंने आईजीएमसी शिमला से एमबीबीएस किया, जिसके बाद चंडीगढ़ में एमएस पूरी की. उनके पांच भाई हैं, जो अभी भी खेतीबाड़ी करते हैं. उन्हें अब तक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 15 अवार्ड मिले हैं. वर्ष 2013, 2016 और 2018 में उन्हें अमेरिका में नेत्र सर्जरी के लिए बेस्ट सर्जन का खिताब मिला था. उन्होंने 45 पुस्तकें लिखी हैं.
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