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हिमाचलः IAS अफसर प्रबोध सक्सेना और अली रज़ा रिज़वी के खिलाफ शिकायत पर PMO की चिठ्ठी

हिमाचल प्रदेश सरकार और नौकरशाही एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है.

हिमाचल प्रदेश सरकार और नौकरशाही एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है.

आईएनएक्स मीडिया कथित घोटाले में फंसे 1990 बैच के IAS अधिकारी प्रबोध सक्सेना के खिलाफ बलदेव शर्मा शर्मा नाम के शख्स ने 2 ...अधिक पढ़ें

शिमला. हिमाचल प्रदेश सरकार और नौकरशाही एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है. आईएएस अधिकारी प्रबोध सक्सेना और अली रज़ा रिज़वी के खिलाफ कुछ माह पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई शिकायत पर पीएमओ से राज्य सरकार को एक चिट्ठी आई है. चिट्ठी में राज्य सरकार को शिकायत पर उचित कार्रवाई के लिए कहा गया है.

हैरानी इस बात की है कि पीएमओ की तरफ से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को 9 सितंबर को चिट्ठी भेजी गई है और इस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी कोई जानकारी नहीं है और न ही इसके बारे में कोई कुछ कहने के लिए तैयार है. ऐसा लग रहा है कि 9 सितंबर से लेकर अब तक ये चिट्ठी मुख्यमंत्री कार्यालय में ही दबी हुई है. News-18 के पास पीएमओ की तरफ से आई चिट्ठी की कॉपी है.

दरअसल, आईएनएक्स मीडिया कथित घोटाले में फंसे 1990 बैच के IAS अधिकारी प्रबोध सक्सेना के खिलाफ बलदेव शर्मा शर्मा नाम के शख्स ने 21 जुलाई 2022 को पीएमओ को शिकायत पत्र लिखा था. शिकायत पत्र में लिखा है कि राज्य सरकार ने प्रबोध शर्मा को गलत तरीके से पदोन्नति दी है. इस पत्र में कुछ अन्य कथित अनियमित्तताओं का भी जिक्र किया गया है.

गलत तरीके से वेतन देने का आरोप

इसके साथ ही 1988 बैच के आईएएस अधिकारी अली रज़ा रिज़वी के खिलाफ के लिखे गए शिकायत पत्र में लिखा गया था कि रिज़वी जब  लंदन में टी बोर्ड में एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्य कर रहे थे, उस वक्त उन्होंने नियमों को दरकिनार प्रबोध सक्सेना की पत्नी को पारिश्रमिक दिया. शिकायत पत्र में लिखा गया है शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रबोध सक्सेना की पत्नी छुट्टी लेकर लंदन गई और अली रज़ा रिजवी के कार्यालय में काम किया. अली रजा रिजवी ने उन्हें गलत तरीके से पारिश्रमिक दिया.

प्रबोध सक्सेना को दी गई प्रमोशन

ये भी बताते चलें कि प्रबोध सक्सेना की पदोन्नति के खिलाफ में 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता ने 1 नवंबर 2022 को मुख्य सचिव आरडी धीमान को एक पत्र लिखा. संजय गुप्ता ने प्रबोध सक्सेना की पदोन्नति को गैर कानूनी और गलत करार दिया है और इस पदोन्नति को रद्द करने की मांग की है. संजय गुप्ता ने शिकायत पत्र में लिखा है कि 300 करोड़ के कथित INX मीडिया केस प्रबोध सक्सेना के खिलाफ केस चलाने के लिए केंद्र सरकार ने 26 अगस्त 2019 को मंजूरी दी थी. आईपीसी की विभिन्न धाराओं में उनके खिलाफ मुकद्दमा दर्ज किया गया, सीबीआई ने भी इस मामले का संज्ञान लिया, इस मामले पर चालान पेश किया गया है वर्तमान में अदालत में ट्रायल चल रहा है. जो मामला प्रबोध सक्सेना पर चल रहा है, इसकी जानकारी राज्य सरकार को सीबीआई की तरफ से भी दी गई थी.

शिकायत पत्र में लिखा गया है कि विधि विभाग की राय के अनुसार, जब किसी अधिकारी पर आपराधिक मामला चल रहा हो और जब तक इसका निपटारा न हो तब तक उस अधिकारी की प्रमोशन नहीं हो सकती, लेकिन तमाम नियमों को दरकिनार कर राज्य सरकार ने साल 2020 के अंत में प्रबोध सक्सेना को प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से पदोन्नत कर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी बना दिया. संजय गुप्ता ने पदोन्नति रद्द कर उन्हे फिर से प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाने की मांग की है.

टिप्पणी से किया इंकार

इन शिकायतों में कितना दम है और आरोपों में कितनी सच्चाई है, इस पर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इस पूरे मामले में जब News 18 की टीम आईएएस अधिकारी प्रबोध सक्सेना के पास उनका पक्ष लेने पहुंची तो प्रबोध सक्सेना ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. सीएम के प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा से संपर्क किया गया तो उन्होंने भी कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. आईएएस अधिकारी अली रज़ा रिजवी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन से संपर्क नहीं हो पाया. उनका पक्ष अभी आना बाकी है.

Tags: Himachal Government, IAS Officer, Shimla

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