Pollution in Himachal: शिमला में भार ढोने वाले वाहनों से कितना प्रदूषण? किया जा रहा सर्वे

शिमला का रेलवे स्टेशन.

पहाड़ों की रानी शिमला में बड़ी संख्या में टूरिस्ट वाहन आते हैं. इसके अलावा, सेब सीजन में काफी ट्रकों की एंट्री होती है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी और पहाड़ों की रानी शिमला (Shimla) में भार ढोने वाले वाहनों से कितना प्रदूषण और कार्बन का उत्सर्जन हो रहा है, इसे कैसे कम किया जा सकता है. इसके लिए शहर में इंटरनेशनल काउंसिल फार लोकल एंवायरमेंट इनीशियेटिव सर्वे (Survey) कर रही है. इसमें कितने वाहन हैं, जो रोजाना शहर में सामान लेकर आते हैं. ये वाहन कितने पुराने हैं. कितने वाहन एक या दो दिन छोड़कर शहर में सामान लेकर पहुंचते हैं. इस पूरे मामले की रिपोर्ट जुटाई जा रही है. इसके लिए ट्रांसपोर्टर, आढ़तियों से लेकर आम शहरियों से बात की जा रही है. कितने लोग लगातार ही इन वाहनों (Vehicle) का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन वाहनों का इस्तेमाल कैसे कम किया जा सकता है.

पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा

शहर की बजाय बाहर से ही भार ढोने वाले वाहनों को कैसे भेजा जा सकता है. इस पर पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाना है.शहर में अभी तक 84 हजार वाहन पंजीकृत है. कामर्शियल तौर पर भार ढोने वाले वाहनों की संख्या भी 10 हजार के लगभग है. इसके अलावा, राजधानी में रोजाना प्रदेश के दूसरे राज्यों से सामान लेकर वाहन पहुंचते है. फेस्टिवल सीजन में इनकी संख्या ज्यादा बढ़ जाती है. इसी तरह से सेब सीजन के दौरान भी ऐसे वाहनों की संख्या शहर में बढ़ जाती है. इन्हें कैसे कम किया जा सकता है. कैसे शहर के बाहर से ही इन सभी को भेजा जा सकता है. इसका सर्वे करने के बाद ये रिपोर्ट निगम को सितंबर या अक्तूबर महीने के अंत तक सौंपी जानी है. नगर निगम के आयुक्त आशीष कोहली ने माना कि सर्वे किया जा रहा है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही अगले फैसले लिए जाने हैं.

विभिन्न स्टेकहोल्डरों को शामिल कर किया जाएगा सर्वे

प्रोजेक्ट अधिकारी वंदना ठाकुर का कहना है कि 2019 में इस प्रोजेक्ट का कार्य शुरु हो चुका था, लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह कार्य धरातल पर नहीं उतर पाया अब नये सिरे से इस प्रोजेक्ट पर कार्य किया जा रहा है. इसकी रिपोर्ट अक्टूबर माह तक पूरी कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न स्टेकहोल्डरों के साथ जगह जगह जाकर किया जायेगा जिसमें व्यापर से जुड़े लोगों और भार ढोने वाले वाहनों पर कार्बन उत्सर्जन पर सर्वे किया जाएगा.

शहर में लगने वाले जाम से भी मिलेगा छुटकारा

भार ढोने वाले वाहनों की संख्या कम होने के बाद शहर में आम लोगों से लेकर सैलानियों को भी जाम से राहत मिलगी. वहीं शहर में प्रदूषण पर नकेल कसने में भी सफलता मिलेगी. शहर में 2018 से इस पर कसरत हो रही है, हालांकि देश के अन्य शहरों में 2017 में ये शुरू हो चुका है. देरी से ही सही लेकिन राजधानी में अब सड़कों पर सर्वें दिखने लगा है. इसका असर कितना प्रभावी होगा, ये तो समय ही तय करेगा, लेकिन सड़कों पर वाहनो की बढ़ती भीड़ से छुटकारा दिलाने की पहल से लोगों को राहत की उम्मीद दिखने लगी है.

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