लॉकडाउन बढ़ने के साथ अब हिमाचल प्रदेश में बढ़ने लगा है प्रदूषण का स्तर
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लॉकडाउन बढ़ने के साथ अब हिमाचल प्रदेश में बढ़ने लगा है प्रदूषण का स्तर
शिमला में छाए बादल. (FILE PHOTO)

लॉकडाउन लागू होने से पहले हिमाचल प्रदेश में प्रदूषण का स्तर 70 फीसदी था, लेकिन लॉकडाउन के पहले फेज में कुछ क्षेत्रों में 65 फीसदी तक गिरावट आई है. अब फेस 2, 3 और 4 में प्रदूषण का स्तर बड़ा है. खास कर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर में ये बढ़ोतरी दर्ज की गई है

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शिमला. कोरोना संकट (COVID-19) के दौरान हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में जब लॉकडाउन शुरू हुआ था तो प्रदूषण (Pollution) के स्तर में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई. लेकिन जैसे-जैसे अब कर्फ्यू में ढील मिल रही है, वैसे-वैसे वाहनों की आवाजाही ओर उद्योगों के शुरू होने से आबो-हवा में फिर जहर घुल रहा है. दरअसल, हिमाचल में 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन से एकाएक प्रदूषण का स्तर काफी गिर गया था. क्योंकि वाहनों की आवाजाही और उद्योगों को बंद कर दिया गया था. लॉकडाउन 4.0 के शुरू होने से पहले प्रदूषण के स्तर में 60 प्रतिशत कमी थी, जो अब 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

नौ शहरों में प्रदूषण में आई थी कमी
प्रदेश के नौ शहरों में प्रदूषण में 65 फीसदी कमी आई थी, वो अब 35 फीसदी तक पहुंच गई है. सोलन के परमाणु, मंडी के सुंदरनगर, शिमला, सिरमौर के पांवटा साहिब, ऊना, धर्मशाला, मनाली, कालाअंब में प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है. अब आरएसपीएम और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है. शिमला में ओल्ड बस स्टैंड पर 20 मार्च को 57.1 आरएसपीएम था. वहीं, 20 अप्रैल को ये कम होकर 33.1 पहुंच गया. फिर छह मई को यह गिरकर 21 आरएसपीएम रिकॉर्ड किया गया. लेकिन लॉकडाउन 4.0 में बढ़कर फिर से 55 पहुंच गया.

मनाली और पांवटा साहिब का हाल



इसी तरह पांवटा साहिब में लॉकडाउन से पहले 84.8 आरएसपीएम था, जो कि लॉकडाउन 1.0 में 50.6, लॉकडाउन 2.0 में 42.3 आरएसपीएम पहुंचा, लेकिन अब फिर बढ़कर 45.2 आरएसपीएम पहुंच गया है. मनाली में 20 मार्च को 41 आरएसपीएम था. 20 अप्रैल को यह 10.6 आरएसपीएम तक पहुंच गया, लेकिन अब 17.6 आरएसपीएम तक पहुंच गया है. धर्मशाला में भी जहां पहले 20 आरएसपीएम था, वहीं अब लॉकडाउन 4.0 में 28 आरएसपीएम पर पहुंच गया है. नाइट्रोजन ऑक्साइड में भी लॉकडाउन लगने के बाद काफी कमी आई थी, लेकिन अब ये भी बढ़ने लगा है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हवा की गुणवत्ता जांच में रिस्पायरेबल सस्पेंडेट पर्टिकुलर मेटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा में भी बढ़ोतरी होने लगी है.



आने वाले दिनों में होगा इजाफा
आने वाले दिनों में बसों की आवाजाही से प्रदूषण में बढोतरी होने वाली है. लॉकडाउन से पहले हिमाचल में प्रदूषण का स्तर 70 फीसदी था, लेकिन लॉकडाउन के पहले फेज में कुछ क्षेत्रों में 65 फीसदी तक गिरावट आई है. अब लॉकडाउन के फेस 2, 3 और 4 में प्रदूषण का स्तर बड़ा है. खास कर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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