हिमाचल में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर माकपा मुखर, आंदोलन की चेतावनी

हिमाचल में निजी स्कूलों में फीस वसूली का मामला.

हिमाचल में निजी स्कूलों में फीस वसूली का मामला.

Private School Fee Issue: माकपा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक व इन स्कूलों व संस्थानों के नियमन के लिए तुरंत अध्यादेश नहीं लाती तो आंदोलन किया जाएगा.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) की मनमानी के मामले पर माकपा ने सरकार के खिलाफ जमकर गुब्बार निकाला है. सीपीएम ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और आंदोलन (Protest) की चेतावनी दी है. कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) का कहना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान निजी स्कूलों को लेकर मनमानी फीस वसूली और नियमन के लिए लाए जा रहे विधेयक को सरकार ने निजी स्कूलों के प्रबन्धन के दबाव में आकर सदन में पेश नहीं किया. माकपा ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए तुरन्त अध्यादेश लाया जाए. साथ ही इसमे मनमानी फीस वसूली पर रोक और  नियमों को बनाकर निजी स्कूलों और संस्थानों के नियमन की व्यवस्था की जाए.

सरकार मनमानी रोकने में विफल

माकपा के वरिष्ठ नेता संजय चौहान ने बयान जारी कर कहा कि सरकार पिछले कई वर्षों से प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने में पूर्णतः विफल रही है. प्रदेश के छात्र व अभिभावकों के संगठन लम्बे समय से निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक व इनके नियमन के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहें हैं, लेकिन सरकार एक ओर से आश्वासन दे रही है और दूसरी ओर से निजी स्कूलों को मनमानी फीस वसूली की छूट दे रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर बयान दे रही थी कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल केवल ट्यूशन फीस ही लेंगे और अब बयान दे रही है कि छात्र, अभिभावक व स्कूल प्रबन्धन आपस में मिलाकर इस विवाद को सुलझाएं.  इससे स्पष्ट हो गया है कि सरकार निजी स्कूलों के प्रबंधन के दबाव में आकर छात्रों व अभिभावकों के हितों से खिलवाड़ कर रही है. सरकार के इस लचर रवैये के कारण आज कई स्कूल मनमानी फीस व सभी चार्जेज के लिए दबाव बना रहे हैं और इनमें से कुछ स्कूल और संस्थान तो छात्रों व अभिभावकों को प्रताड़ित भी कर रहे हैं. अधिकांश स्कूलों ने आगामी वर्ष की फीस में भी बिना किसी से चर्चा कर ही 12 से 20 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि कर दी है जोकि बिल्कुल भी न्यायुचित नहीं है.
जनता की परेशानी और बढ़ी

चौहान ने कहा कि आज जनता कोविड के कारण पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रही है और इस प्रकार की मनमानी से इनकी परेशानी और अधिक बढ़ गई है. सरकार ने जनता को कोविड काल मे किसी भी रूप में राहत प्रदान नहीं की है जबकि सरकार के पास करोड़ों रुपये राहत के लिए जमा हुए हैं.  उन्होंने मांग की कि जो स्कूल अपना खर्च वहन नही कर पा रहे हैं, उन्हें सरकार कोविड के लिए प्राप्त राहत राशि से सहायता प्रदान करे और निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने और अगामी वर्ष स्कूल फ़ीस में वृद्धि पर भी रोक लगाने के तुरंत आदेश जारी करे. साथ चेतावनी दी कि अगर सरकार निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक व इन स्कूलों व संस्थानों के नियमन के लिए तुरंत अध्यादेश नहीं लाती तो सीपीएम छात्रों व अभिभावकों के संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी.
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