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हिमाचल में APG और इंडस यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के विकेट भी गिरे, सौंपे इस्तीफे

हिमाचल प्रदेश.
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Private University VC Resign: नवंबर 2020 में आयोग की एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें 17 में 10 प्राइवेट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को अn oयोग्य करार दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 7:18 AM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में चल रही प्राइवेट यूनिवर्सिटियों के अयोग्य कुलपतियों के खिलाफ नियामक आयोग की कार्रवाई रंग ला रही है. 6 यूनिवर्सिटियों के बाद अब 2 और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की कुर्सी चली गई है. एपीजी यूनिवर्सिटी (APG University) के रमेश कुमार चौधरी और इंडस यूनिवसिटी के सुब्रह्मयण्म रमन अय्यर ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं. आयोग के चेयरमैन मेजर जनरल(रि.)अतुल कौशिक ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि आयोग को इन यूनवर्सिटियों के चांसलर ने इस्तीफे की सूचना दी है.

25 फरवरी तक नए वीसी की नियुक्ति के आदेश
चेयरमैन ने बताया कि आयोग ने इन विवि को आदेश दिए हैं कि 25 फरवरी तक नए वाइस चांसलर की नियुक्ती की जाए. आदेशों के तहत यूजीसी के नियमों के तहत ये नियुक्ति होनी चाहिए और इसकी सूचना लिखित में आयोग को दी जाए.

अब कॉलेजों की बारी
निजी विवि के बाद प्राइवेट कॉलेजों के प्रिसिंपल की बारी है. आयोग के आदेशों के तहत अब तक 100 कॉलेजों के प्रिंसिपलों के दस्तावेज आयोग तक पहुंच गए हैं. जबकि लगभग 70 कॉलेजों को प्रिंसिपलों के दस्तावेज भेजने का रिमाइंडर भेजा गया है. चेयरमैन ने बताया कि आयोग की ओर से गठित कमेटी इन दस्तावेजों को खंगाल रही है, जो भी आयोग्य पाया जाएगा, उसे हटाया जाएगा.



ये है मामला
नवंबर 2020 में आयोग की एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें 17 में 10 प्राइवेट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को अयोग्य करार दिया था. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने इन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपतियों को 10 दिसंबर तक कार्रवाई के आदेश दिए थे.

कमेटी की रिपोर्ट
कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार. 17 निजी विवि में से 8 विवि के कुलपति, वाइस चांसलर पद के लिए यूजीसी की ओर तय की गई शैक्षिण्क योग्यताएं नहीं रखते हैं, यानी वो कुलपति बनने के लिए पात्र नहीं हैं और 2 की उम्र ज्यादा (ओवर ऐज) पाई गई थी. 6 यूनिवर्सिटी के कुलपति योग्य पाए गए हैं, जबकि फर्जी डिग्री मामले में फंसी मानव भारती यूनिवर्सिटी की जांच के चलते उसके कुलपति की योग्यता की जांच नहीं की गई. आयोग के पास तीन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की योग्यता को लेकर शिकायत आई थी. शिकायत के आधार पर आयोग ने एचपीयू के पूर्व कुलपति की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था और इन तीन के अलावा सभी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की योग्यता जांचने के लिए कहा गया. कमेटी ने इनके बायो डाटा के अलावा अन्य शैक्षिण्क योग्यता के दस्तावेजों के जांचा और 10 यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अयोग्य पाए गए.

इन यूनिवर्सिटी के कुलपति अयोग्य पाए गए थे
एमएमयू के वीसी विपिन सैणी, एपीजी यूनिवर्सिटी शिमला के कुलपति रमेश कुमार चौधरी, इटरनल विवि के वीसी देविंद्र कुमार, इक्फाई के एचपी सिंह, इंडस यूनिवसिटी के सुब्रह्मयण्म रमन अय्यर,अरनी यूनिवर्सिटी के संजीव कुमार, चितकारा यूनिवर्सिटी के वीसी, बाहरा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरूण शर्मा अयोग्य पाए गए थे. इनके अलावा शुलिनी विवि के वाइस चांसलर पीके खोसला और बद्दी यूनिवर्सिटी के कुलपति तिलक राज भारद्वाज की उम्र ज्यादा पाई गई थी यानि ये दोनों ओवर एज थे.

6 विवि के वीसी योग्य
महाराज अग्रसेन यूनवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर आरके गुप्ता, आईसी विवि की वीसी प्रो.अंजु सक्सेना, अभिलाषी विवि के प्रो.एचएस बनयाल,जेपी विवि के प्रो. विनोद कुमार, श्री सांई विवि के प्रो.राजेंद्र सिंह राणा और कैरियर प्वाइंट यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.करतार सिंह वर्मा योग्य पाए गए हैं.

हाई पावर कमेटी में थे तीन सदस्य
हाई पावर कमेटी में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और उच्च शिक्षा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में यह कमेटी बनी थी. कमेटी में तकनीकी विवि के वाइस चांसलर प्रो.एसपी बंसल और सरदार वल्लभ भाई पटेल कलस्टर विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. सीएल चंदन शामिल थे.
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