कोरोना सकंट के बीच MC शिमला ने शहरवासियों पर बढ़ाया आर्थिक बोझ
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कोरोना सकंट के बीच MC शिमला ने शहरवासियों पर बढ़ाया आर्थिक बोझ
हिमाचल का शिमला शहर.

मेयर सत्या कौंडल ने बताया कि जो बढ़ौतरी अप्रैल माह में होनी थी उसे जुलाई माह से बढ़ाया गया है अब शहर के सभी प्रॉपर्टी टैक्स उपभोक्ताओं और कूड़े के उपभोक्ताओं को 10 फीसदी बढ़ौतरी के साथ बिल जारी किए गए हैं.

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शिमला. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते एक ओर राजधानी वासी दो जून की रोटी का गुजारा बड़ी मुश्किल से कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर नगर निगम शिमला ने शहरवासियों को नए बिल जारी कर मुसीबत की घड़ी में और संकट डाल दिया है. कोरोना महामारी के काल में नगर निगम शिमला ने शाहरवासियों को 10 फीसदी बढ़ोतरी के साथ प्रॉपर्टी टैक्स और कूड़े के बिल जारी कर आग में तेल डालने का काम किया है. नए जारी किए गए बिल को लेकर माकपा ने नगर निगम के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और आने वाले दिनों में नगर निगम शिमला के खिलाफ जनआंदोलन की चेतावनी दी है.

पूर्व मेयर संजय चौहान का आरोप
पूर्व मेयर संजय चौहान ने नगर निगम शिमला पर आरोप लगाया है कि निगम ने संकट की घड़ी में शहर की जनता पर आर्थिक बोझ डाला है, जिसका जवाब जनता जरुर देगी. उन्होंने कहा कि जब से भाजपा शासित नगर निगम शिमला ने कार्यभार संभाला है, तब से शहर में किसी तरह का कोई नया काम नहीं हुआ है, लेकिन निगम ने जनता पर आर्थिक बोझ जरुर डाला है. निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स,कुड़े,पानी और बिजली के बिलों में 10 फीसदी की बढ़ौतरी की है जो तर्कसंगत नहीं है.

जेब पर सीधा आर्थिक बोझ डाला
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते जहां शहरवासियों का व्यापार तीन माह से पूरी तरह से बन्द पड़ा है, वहीं उन्हें अब रोजी रोटी के लिए भी तरसना पड़ रहा है. ऐसे में नगर निगम शिमला ने राहत के बजाय उल्टा उनकी जेब पर सीधा आर्थिक बोझ डाला है जो न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने कहा कि निगम ने जो 10 फीसदी बिलों में बढ़ौतरी करने का निर्णय लिया है, उसे जल्द वापिस लिया जाए अन्यथा निगम के खिलाफ जनआंदोलन किया जाएगा.



व्यापार मंडल ने भी ऐतराज जताया
नगर निगम शिमला द्वारा संकट के समय में जारी किए बिलों को लेकर शिमला व्यापार मंडल ने भी ऐतराज जताया है. व्यापार मंडल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि संकट के दौर में नगर निगम शिमला ने 10 फीसदी बढ़ौतरी के साथ बिल जारी किए हैं, जो सही नहीं है. उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार और भाजपा शासित नगर निगम निगम राहत देने के बड़े बड़े दावे कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ जनता को बढ़े हुए बिल जारी किए हैं, जो सही नहीं है. उन्होंने कहा कि निगम कह रहा है कि अगर 60 दिनों तक कोई भी व्यापार या दुकान संकट की घड़ी में बंद रहता है तो निगम के पास उसे राहत देने का प्रावधान है. लेकिन शिमला में करीब अढाई महीने तक किसी भी व्यापारी का एक रुपये का व्यापार नहीं हुआ है, जिस पर व्यापारी को राहत की उम्मीद थी लेकिन नगर निगम शिमला ने इसका तोहफा 10 फीसदी बढ़े हुए प्रॉपर्टी टैक्स और कूड़े के रुप मे जारी किया है, जिसका शिमला व्यापार मंडल विरोध करता है. उन्होंने कहा कि व्यापार मंडल इस विषय पर बैठककर अगला निर्णय लेगा.

क्या बोली मेयर
नगर निगम शिमला का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स और कूड़े के बिलों में 10 फीसदी बढ़ौतरी नियमों के तहत की गई है. मेयर सत्या कौंडल ने बताया कि जो बढ़ौतरी अप्रैल माह में होनी थी उसे जुलाई माह से बढ़ाया गया है अब शहर के सभी प्रॉपर्टी टैक्स उपभोक्ताओं और कूड़े के उपभोक्ताओं को 10 फीसदी बढ़ौतरी के साथ बिल जारी किए गए हैं. यह निर्णय लॉक डाउन से पूर्व निगम की मासिक बैठक में लिए गया था, जिसे अब लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि शहरवासियोन को राहत देने के लिए निगम ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है जिस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

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