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बारिश से सेब की फसल को नुकसान, पैदावार में भारी गिरावट के आसार

बारिश से सेब की फसल को नुकसान, पैदावार में भारी गिरावट के आसार

सेब की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के 5000 फीट से कम ऊंचाई वाले इलाकों के सेब बागीचों में पिंक-बड निकल आए हैं। सप्ताहभर में फ्लावरिंग भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सेब की अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है।

सेब की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के 5000 फीट से कम ऊंचाई वाले इलाकों के सेब बागीचों में पिंक-बड निकल आए हैं। सप्ताहभर में फ्लावरिंग भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सेब की अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है।

सेब की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के 5000 फीट से कम ऊंचाई वाले इलाकों के सेब बागीचों में पिंक-बड निकल आए हैं। सप्ताहभर में फ्लावरिंग भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सेब की अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है।

सेब की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के 5000 फीट से कम ऊंचाई वाले इलाकों के सेब बागीचों में पिंक-बड निकल आए हैं। सप्ताहभर में फ्लावरिंग भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सेब की अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है।

वहीं, रविवार को प्रदेश के अधिकतर इलाकों में बारिश दर्ज की गई है। इससे न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट हुई है। बागवानी विशेषज्ञ डॉक्‍टर एसपी भारद्वाज ने कहा कि सेब की फ्लावरिंग के लिए 14 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान बेहतर माना जाता है, लेकिन ताजा बारिश के बाद कुछ क्षेत्रों का पारा 10 डिग्री से काफी नीचे गिर गया है। ऐसा होने से अच्छी फ्लावरिंग और सेटिंग भी अच्छी हो पाएगी।

उधर, प्रदेश के बागवानों को ओलावृष्टि का भी भय सता रहा है। कुछ इलाकों में रविवार को भी हल्की ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। दो सप्ताह बाद राज्य के मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में भी फ्लावरिंग शुरू हो जाएगी। राज्य में करीब छह लाख परिवारों की आर्थिकी सेब पर निर्भर करती है। यही वजह है कि राज्य के बागवान मौसम साफ होने के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं।

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