राजीव आवास योजना: हिमाचल के 300 गरीब परिवारों को 8 साल बाद भी नहीं मिले घर
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राजीव आवास योजना: हिमाचल के 300 गरीब परिवारों को 8 साल बाद भी नहीं मिले घर
हिमाचल का शिमला शहर.

Rajiv House Yojna: शिमला में राजीव आवास योजना के तहत यह पहला प्रोजेक्ट है.लाभार्थी को आवास सुविधा लेने के लिए प्रति यूनिट पर पड़ने वाली कुल कॉस्ट का 10 फीसदी जमा करना होगा.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला (Shimla) में नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते शहरी गरीबों को आठ साल बाद भी आशियाना नहीं मिल पाया है. इसका जीता जागता उदाहरण निगम के अधीन चल रहे राजीव आवास योजना (Rajeev Awaas Yojna) में देखने को मिल रहा है. साल 2012 में निगम के कृष्णानगर वार्ड में जेएनएनयूआरएम के तहत रे प्रोजेक्ट का कार्य शुरु हुआ था, लेकिन निगम की लेटलतीफी के चलते आठ साल बाद भी यह पूरा नहीं हो पाया है. रे प्रोजेक्ट के तहत इन आवासों (House) में शहर के करीब 300 गरीब परिवारों आवास मिलने थे, लेकिन आठ साल बाद भी अब तक मात्र 16 आवास ही तैयार हो पाए हैं, जबकि बाकि आवासों को बनाने का कार्य सुस्त गति से चल रहा है.

यह है परेशानी की वजह

.नगर निगम संयुक्त आयुक्त अजीत भरद्वाज ने बताया कि रे प्रोजेक्ट के तहत कृष्णानगर में जो आवास बनाए जा रहे हैं, उन्हें शहरी गरीब लोगों के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन लैंड स्लाइड के चलते इन आवासों को बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि योजना के तहत करीब 300 आवास बनेंगे. लेकिन अब मौजूदा जगह पर 88 आवास बनाए जाएंगे. बाकी अन्य आवासों को निगम के मल्याणा वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जिन्हें जल्द बनाया जाएगा.



करीब 33.99 करोड़ की लागत से बनेगे 300 यूनिट्स
बता दें कि शिमला को स्लम फ्री बनाने के लिए राजीव आवास योजना के तहत कृष्णानगर को पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत इसे शुरू किया गया है. इस प्रोजेक्ट में गरीबों को आवास की सुविधा देने के लिए करीब 33.99 करोड़ की लागत से कुल 300 यूनिट्स बनाए जाने हैं. इसमें 224 यूनिट्स कृष्णानगर में गरीब परिवारों को आबंटित किए जाएंगे, जबकि बाकी बचे 76 यूनिट्स को नगर निगम किराये पर आबंटित करेगा.आवासीय सुविधा मिलने के साथ लोगों को पार्क, पार्किग, सामुदायिक केंद्र व डिस्पेंसरी की भी सुविधा मिलेगी.

शिमला में निर्माणाधीन मकान.


शिमला में यह पहला प्रोजेक्ट

शिमला में राजीव आवास योजना के तहत यह पहला प्रोजेक्ट है.लाभार्थी को आवास सुविधा लेने के लिए प्रति यूनिट पर पड़ने वाली कुल कॉस्ट का 10 फीसदी जमा करना होगा. प्रोजेक्ट के अप्रुवल के दौरान इस प्रोजेक्ट को दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन एन्वायरनमेंट क्लियरेंस और टैंडर में देरी के चलते इसमें पांच वर्ष का समय लग चुका है.
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