Earthquake: हिमाचल के भवनों पर होगा शोध, रुड़की के संस्थान से हुआ MoU

शिमला में रूड़की के संस्थान के साथ समझौता हुआ है.

शिमला में रूड़की के संस्थान के साथ समझौता हुआ है.

चार जिलों के 40 भवनों पर शोध किया जाएगा, जिसे रेट्रोफिटिंग के तहत किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट कार्य पर करीब करोड़ 47 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे.

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शिमला. भूकंप की दृष्टि से ज़ोन पांच में आने वाले हिमाचल (Himachal Pradesh) के भवनों पर शोध किया जाएगा. प्रदेश के सभी 12 जिलों में होने वाले इस शोध के लिए राज्य आपदा प्राधिकरण और केंद्रीय भवन शोध संस्थान रुड़की के बीच एमओयू (MoU) साइन किया गया है. जो अगले तीन वर्षों के भीतर राज्य के चार जिलों के 40 भवनों (Building) पर शोध करेगी. जो जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा चिंहित की गई है. चिंहित जगहों में अस्पताल,स्कूल और प्राइमरी हेल्थ सेंटर संस्थान हैं, जहां किसी भी आपदा के समय रिलीफ सेंटर बनाया जाता है.

प्रदेश के 40 भवनों पर शोध करेगी आपदा प्रबंधन की टीम

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की को-ऑर्डिनेटर गरिमा शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से जोन पांच में आता है जो बहुत महत्त्वपूर्ण है.प्रदेश में भूकंप या किसी अन्य आपदा के समय कम से कम नुकसान हो इसके लिए अब केंद्रीय भवन शोध संस्थान रूड़की प्रदेश के चिन्हित भवनों का शोध करेगा. इसके लिए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और शोध संस्थान रुड़की की बीच एमओयू साइन किया गया है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में चार जिलों के 40 भवनों पर शोध किया जाएगा, जिसे रेट्रोफिटिंग के तहत किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट कार्य पर करीब करोड़ 47 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे.

सीबीआरआई रुड़की आपदा की देगी जानकारी
सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया का कहना है कि प्रदेश में भूकंप की दृष्टि से भवनों का शोध किया जाएगा,ताकि किसी भी आपदा से निपटने के लिए लोग तैयार रहे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में कांगड़ा, किन्नौर, सिरमौर और हमीरपुर के 40 भवनों में शोध किया जाएगा. इसमें विभिन्न विभागों के अभियंताओं को आपदा के बारे में जागरूक किया जाएगा. जो प्रदेश के सभी जिलों में जाकर शिविर लगाएंगे और लोगों को आपदा के समय होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करेंगे.उन्होंने बताया प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों, अस्पतालों, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों को इसके लिए तैयार किया जाएगा. इसका कार्य एक साल के भीतर हो जाएगा.
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