रूसी बाला और हिमाचली गबरू! लॉकडाउन ने रोकी मोहब्बत की मंजिल
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रूसी बाला और हिमाचली गबरू! लॉकडाउन ने रोकी मोहब्बत की मंजिल
शिमला के शोघी बेरियर पर इन दोनों को पुलिस ने एक ट्रक से पकड़ा.

जिंतेंद्र और लीडिया का कहना है कि वो मानते हैं कि गलती हुई है, लेकिन कम से कम बात तो सुनी जा सकती थी. उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. वो क्वॉरंटीन होने के लिए भी तैयार थे.

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शिमला. किसी ने क्या खूब कहा है, यह इश्क नहीं आसां, एक आग का दरिया है और डूब के जाना है. कुछ ऐसा ही हुआ, कुल्लू (Kullu) के ऑउटर सराज के निथर क्षेत्र के दुराह गांव के रहने वाले जितेंद्र और रूस की रहने वाली लीडिया वोल्फ के साथ. प्रेमी जोड़े (Couple) की मोहब्बत मंजिल तक पहुंचने वाली थी, लेकिन इसी बीच एक गलती हुई और इश्क (Love) की राह में खड़े कोरोनो और हमारे सिस्टम ने विलेन बनकर रास्ता रोक दिया.

पहले इस लव स्टोरी के बारे में बताते हैं. जितेंद्र कुल्लू के कसोल में एक कैफे चलाते हैं. लीडिया कलाकार हैं. पेंटिग (Paintings) बनाती हैं. कुछ साल से भारत में हैं और दिल्ली एनसीआर में काम कर रही हैं. 2 साल पहले लीडिया जितेंद्र के कैफे में आई थी. लीडिया को देखते ही जितेंद्र अपना दिल दे बैठे. बातें-मुलाकातें बढ़ीं और दोनों का प्यार परवान चढ़ा. फिर शादी का फैसला किया. लीडिया जितेंद्र से 9 साल बड़ी है. जितेंद्र की उम्र 24 और लीडिया 35 साल की हैं.

घर वालों को शादी के लिए किया राजी
दोनों ने अपने घर वालों को राजी किया और शादी का फैसला किया. लेकिन, इसी बीच कुछ समय पहले जितेंद्र के पिता की मृत्यु हुई तो शादी टल गई. जनवरी से दोनों नोएडा में रह रहे थे. अब अगले महीने शादी का प्लान था तो वापस अपने गांव आना था. जरूरी कागजात तैयार कर लिए थे. लीडिया ने भी रूस की सरकार से दूतावास के जरिए शादी की मंजूरी ले ली थी.



कहानी में आया ट्विस्ट


अब कहानी में ट्विस्ट आया. कोरोना ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया. इसी बीच इस दोनों ने अपनी कहानी में ‘आग दरिया’ खुद ही चुन लिया. जितेंद्र ने न्यूज-18 को बताया कि इन्होंने अपने गांव वापस जाने के लिए भवानी ट्रांसपोर्ट कपंनी से संपर्क किया. यह चाहते थे कि नोएडा के डीएम से मूवमेंट पास लेकर जांए, लेकिन गाड़ी वाले ने कहा कि उसकी गाड़ी दवाइयां लेकर जाती है, पास की जरूरत नहीं है. कोई नहीं रोकेगा. नोएडा में किराए पर मकान लिया था. उसे छोड़ दिया और जरूरी सामान गाड़ी में भरकर 5 मई की शाम को नोएडा से चल पड़े. गाड़ी वाले से किराए के रूप में 16 हजार रुपये की बात हुई थी.

कई बॉर्डर लांघे पर शिमला में पकड़े गए
दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में इन्हें किसी ने नहीं रोका. हिमाचल के परवाणु बोर्डर पर भी किसी ने नहीं रोका. लेकिन सात मई को जैसे सुबह के समय 4-5 बजे शिमला जिले के शोघी बॉर्डर पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें रोक दिया.

रूस की लीडिया और कुल्लू के जितेंद्र.
रूस की लीडिया और कुल्लू के जितेंद्र.


जितेंद्र ने माना गलती हुई
जितेंद्र मान रहे हैं कि उनसे गलती हुई. यह अपराध हो चुका था कि वो बिना किसी परमिशन से आए थे. लेकिन जितेंद्र का यह भी कहना है कि वो गाड़ी वाले की बातों में आकर फंस गए. शोघी बैरियर पर पुलिस के सामने अपनी बात कहनी चाही लेकिन उनका पक्ष एक बार भी नहीं सुना गया. वो नोएडा से यह सोचकर निकले थे कि अगर उन्हें क्वॉरंटाइन होने के लिए कहा जाता तो वो उसके लिए तैयार थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी. दोनों एक साथ थे, लेकिन पुलिस ने शोघी क्वॉरंटाइन सेंटर में दोनों को अलग कर दिया. एक को एंबूलेंस में लेकर इधर-उधर भटकाते रहे तो दूसरे को क्वॉरंटाइन सेंटर में भेज दिया.

दोनों नोएडा से शिमला एक ट्रक में जा रहे थे.
दोनों नोएडा से शिमला एक ट्रक में जा रहे थे.


क्वॉरंटाइन सेंटर की हालत बेहद खराब
शाम तक प्रशासन और पुलिस ने दोनों को अलग रखा. जितेंद्र लीडिया को वीडियो कॉल करते लेकिन उस पर भी बात नहीं हो पाई. शाम होते-होते जाने प्रशासन को क्या सूझी और फैसला किया गया कि उन्हें वापस नोएडा भेजा जाएगा. जितेंद्र का कहना है कि क्वॉरंटाइन सेंटर की हालत बेहद खराब है, कोई सुविधा नहीं है. वहां कॉमन वॉशरूम और ट्वायलेट हैं. अच्छा खासा आदमी भी वहां बीमार हो सकता है. खैर जब उन्हें वापस भेजने को लेकर कागजी कार्रवाई की जा रही थी तो इन्हें कुछ कागज पर दस्तखत करने को कहा गया. यह सभी कागज हिंदी में लिखे गए थे.

यह बोली लीडिया
लीडिया ने कहा कि वो हिंदी नहीं पढ़ सकती तो अंग्रेजी भाषा में लिखे हुए कागज दिखाए जाएं, ताकि वो उसे पढ़ने के बाद साइन करे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उनसे जबरन हस्ताक्षर करवाए गए और वापस नोएडा भेजा गया. नोएडा वापस जाने का खर्चा जितेंद्र के घरवालों ने उठाया.
शिमला के एसपी ओमापति जम्बाल और डीसी शिमला अमित कश्यप का कहना कहना है कि नियमों के तहत की कार्रवाई की गई है, लेकिन डीसी ने यह नहीं बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की किस धारा के तहत यह नियम है कि जो जहां से आया है उसे वापस भेजा जाए. क्योंकि नियम तो होम या इंस्टिट्यूशनल क्वारंटाइन का है.

मामला दर्ज किया गया
जिंतेंद्र और लीडिया का कहना है कि वो मानते हैं कि गलती हुई है, लेकिन कम से कम बात तो सुनी जा सकती थी. उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. वो क्वॉरंटीन होने के लिए भी तैयार थे. दिनभर परेशान किया गया. इन दोनों ने नोएडा से आने का फैसला भी मार्च में ही किया था.मकान मालिक को पैसे भी दे दिए थे. अब वापस उसी जगह पर भेज दिया गया. जेब में ज्यादा पैसे भी नहीं बचे हैं.

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