SOP के तहत हिमाचल में 21 से खुलेंगे स्कूल, अनुमित पत्र लाना जरूरी, जानें पेरेंट्स की राय

स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

शिक्षकों और छात्रों के बीच 6 फीट की दूरी को अनिवार्य किया गया है.स्कूल आने के लिए छात्रों को अलग-अलग समय (School Timing) दिया जाएगा.

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शिमला. 21 सितंबर को तकरीबन 7 महीनों बाद स्कूल (School) खुलने जा रहे हैं. मंत्रिमंडल में लिए गए फैसले के अनुसार स्कूल में 50 फ़ीसदी अध्यापक ही स्कूल आ पाएंगे. नवीं कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्र ही स्कूल आ सकते हैं. स्कूल आने के लिए छात्रों को अपने अभिभावकों से अनुमति पत्र साथ में लाना अनिवार्य होगा. स्कूल खोलने को लेकर जारी की गई एसओपी के अनुसार ही स्कूल में सारी व्यवस्था करनी जरूरी है. जारी एसओपी (SOP) के अनुसार जो भी छात्र स्कूल खुलने के बाद आएंगे उन्हें बाहर खुले में शिक्षक पढ़ाएंगे.

शिक्षकों और छात्रों के बीच 6 फीट की दूरी को अनिवार्य किया गया है. स्कूल के प्रवेश गेट पर ही थर्मल स्कैनिंग की जाएगी और उसके बाद ही प्रवेश स्कूल कैंपस में दिया जाएगा. स्कूलों में सैनिटाइजेशन के साथ ही हाथ धोने के लिए साबुन भी रखना होगा. एसओपी में यह स्पष्ट किया गया है की बच्चों को स्कूल जाने के लिए किसी भी तरह से बाध्य नहीं किया जाएगा. अगर बच्चे चाहते हैं कि वह स्कूल जाकर किसी विषय से संबंधित अपने अध्यापक से कोई परामर्श लेना चाहते हैं तभी वह स्कूल आ सकते हैं. उसके लिए वह अपने अभिभावकों की लिखित अनुमति मिलने के बाद ही स्कूल आ सकेंगे.

ऐसे होंगे नए नियम



स्कूल आने के लिए छात्रों को अलग-अलग समय दिया जाएगा. छात्रों को स्कूल के कैंपस में एकत्र नहीं होने दिया जाएगा ना ही खेलकूद की गतिविधियां और प्रार्थना भी नहीं करवाई जाएगी. जिस छात्र में जुखाम,खांसी और बुखार जैसे लक्षण है उन्हें स्कूल में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अगर कोई बच्चा बीमार महसूस करता है तो उसकी तुरंत जानकारी अधिकारियों को शिक्षकों को देनी होगी. इसके साथ ही कैंपस में साफ सफाई की व्यवस्था का भी पूरा प्रबंध किया जाएगा. शनिवार और रविवार को स्कूलों में इसके लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा. वहीं शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक पर शिक्षकों और गैर शिक्षकों की हाजिरी नहीं लगाई जाएगी.
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लक्कड़ बाजार के प्रधानाचार्य भूपेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार से कौन से शिक्षक स्कूल आएंगे इसके लिए रोस्टर भी विभाग की ओर से जारी किया जाएगा.

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अभिभावकों में गुस्सा

हिमाचल सरकार के फैसले से अभिभावकों में काफी गुस्सा दिख रहा है. अभिभावकों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने हमेशा से ही कोरोना के समय में जो फैसला लिया है उसने किसी से भी कोई परामर्श नहीं लिया. तो ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से एसओपी में जो निर्देश दिए गए हैं कि अभिभावक चाहेंगे तो ही बच्चे स्कूल जा सकते हैं. ऐसे में अब सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रही है. अगर बच्चे स्कूल जाएंगे और उनमें संक्रमण फैलता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? अभिभावकों ने यह भी कहा कि स्कूल जाने पर बच्चे आपस में मिलेंगे और ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो जाएगा. वहीं जिन वाहनों के जरिए वह स्कूल तक जाएंगे तो उसमें भी कोरोना फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है. प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो ऐसे में प्रदेश सरकार ऑनलाइन क्लासेस की जगह स्कूल खोलने का फैसला क्यों ले रही है? कुछ अभिभावकों ने तो यह भी कहा कि सरकार अपने इस फैसले को वापस ले और बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन क्लासेस या कोई और विकल्प देखें, ताकि बच्चे सुरक्षित रह सकें.
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