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हिमाचल: शांशा नाले में एक बार फिर पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात, लगातार जारी है बहाव

शांशा व किरतिंग गांव के दर्जनों पेयजल व सिंचाई कुहल क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

शांशा व किरतिंग गांव के दर्जनों पेयजल व सिंचाई कुहल क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

Himachal Rain: इन दिनों शांशा, किरतिंग तथा आस पास के इलाकों में मटर, गोभी तक दूसरे नकदी फसलें तैयार होने के कगार पर हैं, जिसके लिए इन दिनों पानी की काफी आवश्यकता रहती है, लेकिन बाढ़ ने शांशा नाले से मिलने वाले दर्जनों पेयजल व कुहलों को क्षति पहुंचाई है.

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हाइलाइट्स

उदयपुर-केलांग मार्ग पर सभी प्रकार की वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से हो रही है.
शांशा नाले में मिट्टी व रेत भरे पानी का बहाव जारी है.

लाहौल स्पीति. हिमाचल प्रदेश में लाहौल के शांशा नाले में बारिश के बाद आई बाढ़ से शांशा व किरतिंग गांव के दर्जनों पेयजल व सिंचाई कुहल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. चिंता की बात यह है कि अब भी शांशा नाले में मिट्टी व रेत भरे पानी का बहाव जारी है और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. इस इलाके के सैकड़ों ग्रामवासियों के सामने पेयजल व सिंचाई पानी का संकट उत्पन्न हो गया है.

दरअसल इन दिनों शांशा, किरतिंग तथा आस पास के इलाकों में मटर, गोभी तक दूसरे नकदी फसलें तैयार होने के कगार पर हैं, जिसके लिए इन दिनों पानी की काफी आवश्यकता रहती है, लेकिन बाढ़ ने शांशा नाले से मिलने वाले दर्जनों पेयजल व कुहलों को क्षति पहुंचाई है. मिट्टी व रेत भरा पानी शांशा नाले में बह रहा है. इससे इलाके के दर्जनों गांव के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का अंदेशा सताने लगा है.

प्रशासन करे दौरा

शांशा नाला इलाके के लोगों को डर सता रहा है कि कहीं पिछले साल जैसी हालत फिर ना हो जाए. स्थानीय किसान दलीप डोको का कहना है कि पिछले वर्ष की बाढ़ से शांशा, किरतिंगवासी अभी उभर नही पाए थे. ऐसे में एक बार फिर ऐसी स्थिति पैदा होने से लोगों के दिलों में डर बैठ गया है. गांव वालों ने स्थानीय विधायक व प्रदेश सरकार से शीध्र प्रभावित इलाके का दौरा करने की गुहार लगाई है. साथ ही नुकसान का आकंलन कर क्षतिग्रस्त सिंचाई कुहल, पेयजल परियोजनाओं को दु़रस्त करने के लिए बजट का प्रावधान करने की बात की है.

मिट्टी वाला पानी फसलों के​ लिए बेकार

किरितंग गांव के अन्य किसान राजकुमार का कहना है कि घाटी की एक मात्र नकदी फसल मटर, गोभी आदि तैयार होने को है. इस दौरान सिंचाई पानी की अत्यन्त आवश्यकता रहती है, लेकिन मिट्टी व रेत भरा पानी सिंचाई फसल के लिए उपयुक्त नहीं है. इसे लेकर सरकार व जिला प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए गुहार लगाई गई है.

बता दें कि पिछले वर्ष जुलाई माह में आई भयानक बाढ़ ने सिचाईं कुहलों, पेयजल परियोजनाओं व पुल को भी नुकसान पहुंचाया था. शांशा नाले में स्थिति पर नजर रखने व यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस विभाग की ओर पुलिस जवान व सीमा सड़क संगठन की ओर से भी कर्मचारी तैनात किए गए हैं. फिलहाल इस पुल के माध्यम से केलांग उदयपुर व उदयपुर केलांग के लिए सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से हो रही है.

Tags: Himachal news, Lahaul Spiti

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