Independence Day 2020: शिमला की इस बिल्डिंग में पढ़ा गया था भारत-पाक विभाजन का पहला ड्राफ्ट
Shimla News in Hindi

Independence Day 2020: शिमला की इस बिल्डिंग में पढ़ा गया था भारत-पाक विभाजन का पहला ड्राफ्ट
शिमला का एडवांस स्टडी सेंटर.

Happy Independence Day: एडवांस स्टडी सेंटर (Advance Centera) को आजादी से पहले वॉयसराय लॉज (Vice Roy Regal Lodge Shimla) के रूप में जाना जाता था. आजादी के बाद इसे राष्ट्रपति निवास (President House) में तब्दील कर दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 15, 2020, 8:46 AM IST
  • Share this:
शिमला. हमारा देश आज 74वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) मना रहा है. आजादी के लिए हमारे देश के लोगों ने बड़ी कीमत चुकाई है. हालांकि, जब-जब देश की आजादी का जिक्र होगा, तब-तब शिमला का नाम ना आए, ऐसा शायद ही हो. क्योंकि, शिमला (Shimla) देश की आजादी के इतिहास (History) का सबसे बड़ा गवाह है. आजादी से पहले और बाद में भी कई ऐतिहासिक (Historical) फैसले यहां हुए. फिर चाहे बात ‘शिमला सम्मेलन’ की हो या कैबिनेट मिशन बैठक की. ऐसे बहुत से अहम फैसले और बैठकें शिमला (Shimla) के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज़ (वॉयस रीगल लॉज) में ही हुईं.

शिमला का एडवांस स्टडीज़ संस्थान

भारत के विभाजन की पटकथा भी इस एडवांस स्टडीज़ में ही लिखी गई. 14 जून 1945 का दिन था. शिमला सम्मेलन की घोषणा हुई. वायसराय लार्ड बेवल ने रेडियो प्रसारण में शिमला सम्मेलन की घोषणा की. इसकी रूपरेखा तत्कालीन राजनीतिक स्थिति में सुधार लाने और भारत को पूर्ण स्वराज के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर करने के लिए तैयार की गई थी. देश की आजादी से पहले यहां कई फैसले हुए, जो आज भारतीय इतिहास में अंकित हैं.



कई बड़े दिग्गज नेता पहुंचे थे शिमला
25 जून से 14 जुलाई, 1945 तक एंडवास स्टीज (वॉयसरीगल लॉज) में चला. इस बैठक में भारतीय राजनीतिक नेतृत्व के महात्मा गांधी, मौलाना आजाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सी राजगोपालाचारी, मास्टर तारा सिंह और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे राष्ट्रीय नेता शिमला पहुंचे. अहम बात यह है कि पूरे सम्मेलन के दौरान महात्मा गांधी शिमला में रहे, लेकिन सम्मेलन की किसी भी बैठक में वह शामिल नहीं हुए. आखिरकार, दो हफ्तों तक चली जद्दोजहद सिरे नहीं चढ़ पाई. यूं कहें कि भारत के विभाजन को रोकने का यही अंतिम अवसर था, जो हाथ से निकल गया था.

शिमला में हुए भारत विभाजन के समझौते पर साइन

देश के विभाजन का पहला ड्राफ्ट भी एडवांस स्टडी में पढ़ा गया था. साल 1947 में महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना ने एडवांस स्टडीज में ही भारत-पाक विभाजन को लेकर सहमति पर हस्ताक्षर किए. 3 जून 1947 को माउंटबेटन, जिन्ना और नेहरू ने ऑल इंडिया रेडियो पर भारत-पाकिस्तान विभाजन की घोषणा कर दी. मुस्लिम बहुल समुदाय वाले राज्य पाकिस्तान में शामिल हुए और हिंदू बहुमत वाले राज्य भारत का हिस्सा बने. पंजाब और बंगाल, जो मुस्लिम बहुल राज्य थे, उन्हें भारत और पाकिस्तान में आधा-आधा बांटने का फैसला हुआ.

शिमला का एडवांस स्टडी सेंटर.


देश की सीमा को लेकर विवाद

देश आज़ाद होने में मात्र 3 महीने का समय बचा था. लेकिन अब तक दोनों देशों की सीमा रेखा निर्धारित नहीं हो पाई थी. दोनों देशों की सीमा निर्धारित करने का काम सीरिल रैडक्लिफ को दिया गया. रैडक्लिफ ब्रिटिश बेरिस्टर थे. उन्हें वॉयसराय ने दोनों देशों के विभाजन का सबसे बड़ा कार्य सौंपा था.

देश के बंटवारे वाली टेबल है यहां मौजूद

दावा किया जाता है कि देश के बंटवारे के वक्त जिस टेबल पर कागजात और अन्य चीजें साइन हुईं, वह अब भी एडवांस स्टडी में मौजूद है. इस टेबल को भी दो टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया था. हालांकि, प्रशासन इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. प्रशासन कहता है कि इसे लेकर दावा किया जाता है. वहीं, देश के विभाजन का पहला ड्राफ्ट भी एडवांस स्टडी में पढ़ा गया था.

पहले राष्ट्रपति निवास हुआ करती थी यह बिल्डिंग

एडवांस स्टडी सेंटर को आजादी से पहले वॉयसराय लॉज के रूप में जाना जाता था. आजादी के बाद इसे राष्ट्रपति निवास में तब्दील कर दिया गया. 1964 में इसे रिसर्च संस्थान में बदल दिया गया. बता दें कि हैनरी इर्विन ने इस बिल्डिंग का आर्किटेक्चर तैयार किया था. 1884 से लेकर 1888 के बीच इस भवन का निर्माण किया गया. यह बिल्डिंग शिमला समझौते से लेकर कई ऐतिहासिक बातों की गवाह है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading