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शिमला: कच्ची घाटी में भवन तोड़ने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जानें क्या है वजह

कच्ची घाटी में पिछले हफ्ते 8 मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने के कारण साथ लगती इमारतों के ढह जाने का अंदेशा बना हुआ है.

कच्ची घाटी में पिछले हफ्ते 8 मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने के कारण साथ लगती इमारतों के ढह जाने का अंदेशा बना हुआ है.

न्यायालय (Court) ने कहा कि विध्वंस पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश दिया जा सकता है. यदि इमारत बाद में ढह जाती है तो याचिकाकर्ता जानमाल को हुए किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार होगा.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Himachal Pradesh High Court) ने कच्ची घाटी (Raw Valley) में एक इमारत को असुरक्षित मानते हुए उसे ध्वस्त करने के मामले में फिलहाल स्थगन आदेश पारित कर दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ व न्यायाधीश सबीना (Ravi Malimath And Judge Sabina) की खंडपीठ ने मोहिंदर सिंह द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात स्थगन आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विचाराधीन इमारत को खाली कर दिया गया है और अब इमारत में कोई नहीं है. वह कोर्ट के अगले आदेश तक सम्बन्धित परिसर में कब्जा नहीं करेंगे. न्यायालय ने कहा कि विध्वंस पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश दिया जा सकता है. यदि इमारत बाद में ढह जाती है तो याचिकाकर्ता जानमाल को हुए किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार होगा. इसी के मद्देनजर दिनांक 4 अक्टूबर को जारी विध्वंस के आदेश पर आठ सप्ताह की अवधि के लिए रोक लगा दी गई है.

दरअसल, कच्ची घाटी में पिछले हफ्ते 8 मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने के कारण साथ लगती इमारतों के ढह जाने का अंदेशा बना हुआ है.जिस कारण जान व माल के नुकसान की आशंका बनी हुई है. बता दें कि तीन दिन पहले नगर निगम शिमला ने कच्ची घाटी में चार भवनों को असुरक्षित घोषित कर इन्हें भवन मालिकों को ही तोड़ने के आदेश जारी किए थे लेकिन मौसम साफ होते ही एक भवन मालिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसके बाद आज कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 8 सप्ताह तक रोक लगा दी है.

एमसी की टीम ने भवन को तोड़ने के दिए थे आदेश
बता दें कि एमसी शिमला की तकनीकी टीम ने चार दिन पहले कच्ची घाटी का दौरा किया था, जहां 30 सितंबर को आठ मंजिला भवन ढह गया था. उसके बाद प्रदेश सरकार ने डीसी शिमला के नेतृत्व में एक जांच कमेटी का गठन किया था. जांच कमेटी ने एमसी की टीम को जांच का जिम्मा सौंपा था. जांच के बाद कच्ची घाटी में चार भवनों को असुरक्षित घोषित कर तोड़ने के आदेश दिए थे. लेकिन अब भवन मालिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटका कर राहत की सांस ली है. उधर, भवन मालिक रोहन कुकरेजा ने बताया कि उनका भवन पूरी तरह से सुरक्षित है. कोर्ट ने उन्हें आठ सप्ताह तक राहत दी है. उन्होंने कहा कि एमसी अगर जांच करना चाहता है तो जांच की जाए. लेकिन उनका भवन नियमों के तहत बना है और भवन में किसी तरह की कोई दरार नहीं आई है.

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