हिमालयन स्कूल विवाद: पूर्व प्रिंसिपल बोलीं-कुछ लोगों की साजिश, मुझे जान का खतरा

शिमला का स्कूल स्टाफ को नहीं दे रहा सैलरी.
शिमला का स्कूल स्टाफ को नहीं दे रहा सैलरी.

Himalayan School Controversy: मामले की जांच में पता चला कि रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार ये जमीन कोटी रियासत की थी. ब्रिटिशकाल में इस जमीन को पट्टे पर अंग्रेज अधिकारी सर एडवर्ड बक को दिया गया. साल 1955 में अंग्रेज अफसर की बेटी लोरना ने इसे दरभंगा की एक रानी को आगे पट्टे पर दे दिया. इसके बाद वर्ष 1977 में जगजीत सिंह ने एग्रीमेंट कर जमीन ली थी

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 2:25 PM IST
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शिमला. हिमाचल की राजधानी शिमला (Shimla) के छराबड़ा स्थित हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल (Himalayan International School) में चल रहे विवाद के बीच अब पूर्व प्रिंसिपल राज काथ चौधरी सामने आई हैं. उन्होंने बयान दिया है कि स्टाफ ने जो उनपर आरोप लगाए हैं, वो बेबुनियाद है,उनका यहां तक कहना है कि स्टाफ (Staff) के कुछ लोग हमेशा साजिश करते थे,उन्हें मानिसक रूप से प्रत्राड़ित करते थे. पूर्व प्रिंसिपल का कहना है कि उनका सामान स्कूल (School) में पड़ा है, अगर वो उसे लेने गईं तो उन पर हमला हो सकता है और मारा जा सकता है. ये तक कहा कि अगर मुझ पर हमला हुआ तो मेरी चीख-पुकार सुनने वाला भी कोई नहीं है.

वहीं, दूसरी ओर स्टाफ ने हाल ही में कहा था कि उन्हें 9 महीने से सैलरी (Salary) नहीं मिली है, उन्हें बहुत सारी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है जिसके लिए पूर्व प्रिंसिपल सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. इन सबके बीच एक हकीकत ये है कि इस स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ हर चीज पर ताला लगा हुआ है और प्रबंधन लापता है.

कोर्ट केस करेंगी प्रिंसिपल
पूर्व प्रिंसिपल ने बयान जारी कर कहा कि उन पर जो आरोप लगाए गए हैं. उसके खिलाफ वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. जिसने आरोप लगाए हैं उन्हें अदालत में सबूतों के साथ जबाव देना होगा. पूर्व प्रिंसिपल ने कहा कि 21 मार्च को वो स्कूल प्रबंधन से बात करने चंडीगढ़ गई थीं. 22 को रविवार था और 23 मार्च को प्रबंधन ने उन्हें मिलने की समय नहीं दिया. 24 मार्च से लॉकडाउन लग गया, जिसके चलते वो वहीं पर फंस गईं. उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी स्टाफ के आरोप गलत हैं, सिक्योरिटी से केवल खेमचंद के फोन आते थे,बाकि किसी ने फोन नहीं किया. उन्होंने कहा कि बड़ी मेहनत करके मैंने स्टाफ की जनवरी की सैलरी दिलवाई थी. सफाई कर्मचारी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि शीला की वजह से माहौल खराब था, ना कि उनकी वजह से. पूर्व प्रिंसिपल ने यहां तक कहा कि वो मुझे गालियां देती थीं, क्योंकि वो अच्छे से काम नहीं करती थी और मैं केवल काम के लिए कहती थीं. सही से काम न करने को लेकर एक बार पहले भी वो माफीनामा दे चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अब वो शीला को कोर्ट में घसीटेंगी.
‘स्टाफ करता है साजिश, किसी को टिकने नहीं देता’


स्कूल को संचालित करने वाली सरदार कुमेर सिंह शिक्षा सोसायटी के अध्यक्ष पद को लेकर पूर्व प्रिंसिपल ने सफाई दी कि वो एक अस्थाई नियुक्ति थी, क्योंकि उस वक्त के प्रेजिडेंट को विदेश जाना था. उन्होंने कहा कि 6 जनवरी को उन्होंने प्रबंधन को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वो मार्च माह में इस पद और प्रिंसिपल के पद से इस्तीफा दें देंगी. उनकी बेटी को उस वक्त की सचिव रीना के इस्तीफे के बाद नियुक्ति दी गई थी और बाद में उनकी बेटी ने भी इस्तीफा दिया था. स्टाफ को लेकर पूर्व प्रिंसिपल ने कहा कि स्टाफ में कुछ तत्व ऐसे थे जो किसी भी स्कूल प्रमुख को टिकने नहीं देते थे, हमेशा साजिश करते थे और धमकियां देते रहते थे. उन्होंने कहा कि स्कूल में अधिकतर काम उन्होंने अपने पैसे से करवाया है,कुछ बिल अभी पेंडिंग पड़े जोकि प्रबंधन ने देने हैं. उन्होंने कहा कि उनके दामन पर आजतक कोई दाग नहीं लगा है, बल्कि अब तक जो भी कुछ स्टाफ के साथ हुआ है उनकी अपनी वजह से हुआ है. उन्होंने कहा कि उनका करीब ढेड़ लाख रूपए का फर्नीचर स्कूल में अब भी पड़ा है,अगर वो उसे लेने गईं तो शायद उनपर हमला हो सकता है.

प्रबंधन का नाम नहीं बताया
पूर्व प्रिंसिपल ने जो बयान दिया है उसमें अभिभावकों की चिंता पर उन्होंने कुछ नहीं कहा है और न ही फीस के संबंध में कुछ बोला है.इतना जरूर बोला कि उन्हें बच्चों की पढ़ाई की चिंता है, लेकिन कोरोना के इस दौर में छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने ये तो बताया कि प्रबंधन को इस्तीफा दिया लेकिन प्रबंधन में कौन हैं, किसको इस्तीफा दिया, ये नहीं बताया. आपको बता दें कि स्टाफ ने सरकार के तंत्र के हर दरवाजे पर मदद की गुहार लगाई है. शिक्षा मंत्री, विधायक राकेश सिंघा, शिक्षा निदेशालय और डीसी के पास भी शिकायत की है.

बेनामी घोषित हो चुकी है जमीन,सांसद केडी सिंह से भी जुड़ाव
बता दें कि इस स्कूल की जमीन को लेकर भी कई विवाद हो चुके हैं. साल 2015 में उपायुक्त शिमला की कोर्ट ने जमीन को बेनामी घोषित किया था और प्रदेश सरकार में निहित करने के आदेश दिए थे लेकिन अब तक सरकार ने कब्जा नहीं किया है. स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल राज काथ चौधरी के मुताबिक 32 बीघा यह जमीन मौजूदा समय में सोलन के एक व्यक्ति संदीप सेठी के नाम पर है,इसकी लीज 2025 तक है लेकिन जानकारी के मुबातिक वर्ष 2010 में जब इस जमीन का सौदा 6 करोड़ रू. में हुआ था. पैसे का भुगतान अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी लिमिटेड कंपनी ने किया था और उस वक्त मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये कंपनी टीएमसी के राज्यसभा सांसद केडी सिंह के परिवार से जुड़ी हुई है.

कोटी रिसासत की थी जमीन
मामले की जांच में पता चला कि रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार ये जमीन कोटी रियासत की थी. ब्रिटिशकाल में इस जमीन को पट्टे पर अंग्रेज अधिकारी सर एडवर्ड बक को दिया गया. साल 1955 में अंग्रेज अफसर की बेटी लोरना ने इसे दरभंगा की एक रानी को आगे पट्टे पर दे दिया. इसके बाद वर्ष 1977 में जगजीत सिंह ने एग्रीमेंट कर जमीन ली थी
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