अंग्रेजों के जमाने के शेर के मुंह वाले नलों से फिर निकलेगी जलधारा, जल निगम करा रहा दुरुस्त

अंग्रेजों के जमाने के इन शेर के मुंह वाले नलों के चोरी चले गए पार्ट अब मिलना मुश्किल है. लेकिन शिमला जल निगम जुगाड़ के सहारे इन्हें दुरुस्त कर रहा है

शिमला जल निगम के अधिकारी के मुताबिक वर्ष 1934 में शहर के विभिन्न स्थानों पर अंग्रेजों ने शेर के मुंह वाले नल (Lion Mouth Water Tap) स्थापित किए थे जिनका लोग पानी पीने और आग बुझाने के लिए फायर हाइड्रेंट (Fire Hydrant) के रुप मे इस्तेमाल करते थे

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शिमला. पहाड़ों की रानी शिमला (Shimla) में एक बार फिर शेर के मुंह वाले नल (Lion Mouth Water Tap) से पीने का पानी निकलेगा. ब्रिटिशकालीन (British Era) विरासत को संजोने के लिए शिमला जल निगम (Shimla Jal Nigam) की योजना इन्हें दुरुस्त कर दोबारा चालू करने की है. ठीक होने के बाद इनके कान मरोड़कर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक अपनी प्यास बुझा सकेंगे. शिमला शहर में पानी का जिम्मा संभाल रहा जल निगम ने वर्षों से खराब पड़े ऐसे सभी शेर मुंह वाले हाइड्रेंट को दुरुस्त करने की कवायद शुरू की है. अंग्रेजों के जमाने में लगाए गए शेर के मुंह वाले नलों का उपयोग लोग पेयजल के लिए करते थे. साथ ही शहर में आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने के लिए फायर हाइड्रेंट का कार्य करते थे.

1934 में लगाए गए शेर के मुंह वाले नलों को किया जाएग दुरुस्त
जल निगम के अधिकारी के मुताबिक वर्ष 1934 में शहर के विभिन्न स्थानों पर अंग्रेजों ने शेर के मुंह वाले नल स्थापित किए थे जिनका लोग पानी पीने और आग बुझाने के लिए फायर हाइड्रेंट के रुप मे इस्तेमाल करते थे. यह देखने में जितने आर्कषक लगते हैं उतने ही खूबसूरत तरीके से इनमें से पानी निकलता था. कुछ वर्षों पहले यह ऐतिहासिक नल खराब हो गए थे लेकिन अब इनका जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया है. अभी तक ऐसे पांच पेयजल नलों को दुरुस्त किया गया है. आने वाले दिनों में बाकी जगहों पर भी इन्हें ठीक कर लिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इन्हें दुरुस्त करना किसी चुनौती से कम नहीं है लेकिन जुगाड़ के सहारे जल निगम के मिस्त्री (प्लंबर) द्वारा इन्हें ठीक किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि शहर में इस तरह के नए टैप लगाने के लिए बटाला से लेकर लंदन तक जांच-पड़ताल की जा रही है. यदि इस तरह के नल दोबारा मिलते हैं तो इसे स्थापित किया जाएगा.

किसी चुनौती से कम नहीं इन पेयजल नलों को दुरुस्त करना
वहीं जल निगम के मिस्त्री मस्तराम का कहना है अंग्रेजों के जमाने के इन पेयजल नलों को दुरुस्त करना किसी चुनौती से कम नहीं. इन्हें समझने के लिए पहले पूरे नल को खोला गया फिर सोच-समझकर इन्हें पुन: चालू करने के लिए जुगाड़ का सहारा लिया गया. उन्होंने बताया कि पुराने जमाने के इन नलों के चोरी चले गए पार्ट अब मिलना मुश्किल है. लेकिन जुगाड़ के सहारे इन्हें दुरुस्त किया जा रहा है ताकि शहरवासियों के साथ यहां आने वाले पर्यटकों को नए रुप में विकसित किए जा रहे इन ऐतिहासिक नलों से पीने का पानी उपलब्ध हो सके.

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