Exclusive: शिमला के KNH अस्पताल में डिलीवरी में बेरहमी से चिरफाड, बच्चे के सिर पर पड़े निशान
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Exclusive: शिमला के KNH अस्पताल में डिलीवरी में बेरहमी से चिरफाड, बच्चे के सिर पर पड़े निशान
शिमला का कमला नेहरू अस्पताल.

Shimla Kamla Nehru Hospital: कमला नेहरू अस्पताल हमेशा से ही अपनी लापरवाही को लेकर सुर्खियों (Headlines) में रहता है. अभी हाल ही में कुछ महीनों पहले एक जिंदा बच्ची (Baby) को यहां के स्टाफ ने मृत (Dead) समझकर डेड बॉडी-ट्रे में रख दिया था.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) का इकलौता मातृ-शिशु कमला नेहरू अस्पताल (Kamla Nehru Hospital) फिर विवाद और सुर्खियों में हैं. अस्पताल पर डिलीवरी के दौरान लापरवाही और चिरफाड़ के आरोप लगे हैं. आरोप है कि डिलीवरी (Delivery) के दौरान अस्पताल में इतनी बेरहमी से चिरफाड़ की गई कि नवजात के सिर और चेहरे पर हल्के निशान पड़ गया है. वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मामले की शिकायत (Complaint) नहीं मिली है, अगर शिकायत आई तो जांच होगी.

सोशल मीडिया पर उछला मामला

हाल ही में फेसबुक पर हेमानंद शर्मा नाम के एक शख्स ने एक पोस्ट की और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. पोस्ट के अनुसार, महिला की डिलीवरी नर्सिंग स्टाफ ने की और डॉक्टर कोरोना ड्यूटी के बहाने से गायब थे. आरोप और दावा है कि 5 अगस्त रात को महिला की डिलीवरी करवाई गई. उस रात अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ ने 45 डिलीवरी करवाई. डिलीवरी करवाने की इतनी जल्दी थी कि पूरे वार्ड में बस महिलाओं की चीख पुकार मची हुई थी. जिन महिलाओं की डिलीवरी की गई, उनमें से अधिकतर नवजातों के शरीर पर कट के निशान थे. वहीं, जो महिलाएं दर्द से करा रही थी, उनके साथ भी स्टाफ अच्छे से व्यवहार नहीं किया. पोस्ट में दावा किया गया है कि स्टाफ ने कुछ महिलाओं को थप्पड़ भी मारे हैं.



कमला नेहरू अस्पताल शिमला.

न्यूज़-18 की टीम ने की पड़ताल

न्यूज़-18 की टीम में मामले की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले फेसबुक पर पोस्ट डालने वाले शख्स से संपर्क साधा तो पता चला कि वह शख्स एक महिला के रिश्तेदार है. उन्होंने बताया कि डिलीवरी से पहले महिला की सभी रिपोर्ट नॉर्मल थी, लेकिन जब डिलीवरी के बाद बाहर लाया गया तो बच्चे के शरीर पर कैंची या छुरी के निशान थे. महिला की स्थिति इतनी खराब है कि वह करीब ढाई महीनों तक बेड से नहीं उठ सकती है. उन्होंने दावा किया कि डिलीवरी के समय डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद थे. नर्सिंग स्टाफ ने डिलीवरी करवाई थी.

महिलाएं डर गई थी

उन्होंने बताया कि उनकी रिश्तेदार इतनी डर गई है कि वह फिर कभी कमला नेहरू अस्पताल नहीं जा पाएंगे. महिलाओं के साथ वहां का स्टाफ बुरी तरह से पेश आ रहा था. चीख-पुकार कर रही कुछ महिलाओं को स्टाफ ने थप्पड़ तक जड़ हैं.

महिला से बातचीत

हेम शर्मा ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या डॉक्टर के पास बाकी मरीजों के इलाज के लिए समय नहीं है. सभी डाक्टर स्वयं को कोरोना ड्यूटी में बता रहे हैं. पीड़ित महिला का कहना है कि नवजात के शरीर पर सच में सिर और आंख के पास हल्के निशान हैं. महिला ने बताया कि करीब 3 महीनों तक बिस्तर से नहीं उठ सकती हैं. उन्हें करीब 16 से भी ज्यादा टांके लगाए गए.

प्रशासन से जांच की मांग

घटना पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने प्रशासन से जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है. समिति की शहरी सचिव सोनिया शबरवाल का कहना है कि महिलाओं ने खुद आपबीती महिला समिति को सुनाई है और महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें कमला नेहरू अस्पताल जाते हुए भी डर लगता है, इसलिए महिला समिति का मानना है कि या तो सरकार अस्पताल में स्त्री विशेषज्ञ को तैनात करे और आये दिन ऐसी घटने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाए.

कमला नेहरू अस्पताल शिमला.


क्या बोली एमएस डॉक्टर अंबिका चौहान

अस्पताल की एमएस डॉक्टर अंबिका चौहान ने फोन पर बताया कि रिटर्न में कोई भी शिकायत नहीं आई है. यदि कोई शिकायत करता है तो इस मामले में जरूर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

सुर्खियों में रहता है अस्पताल

कमला नेहरू अस्पताल हमेशा से ही अपनी लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रहता है. अभी हाल ही में कुछ महीनों पहले एक जिंदा बच्ची को यहां के स्टाफ ने मृत समझकर डेड बॉडी-ट्रे में रख दिया था. अस्पताल में काफी बवाल हुआ था. प्रशासन ने कहा था कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अभी तक इस मामले में ना तो कोई दोषी मिला है और यह मामला फाइलों में कहां दब कर रह गया.
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